क्षेत्रीय
04-May-2026
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- जायके के बीच इंदौरियों को बताया डेयरी और बीफ उद्योग का अनकहा सच :: इंदौर (ईएमएस)। शहर के दिल छप्पन दुकान पर हाल ही में खान-पान के शौकीनों के बीच पर्यावरण और पशु अधिकारों को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई। मौका था इंदौर सहित देश के 20 शहरों में युवाओं द्वारा शुरू की गई एक अनूठी मुहिम का, जिसमें डेयरी उद्योग के उन पहलुओं को उजागर किया गया जो अब तक विज्ञापनों की चकाचौंध में दबे हुए थे। युवाओं ने एक सार्वजनिक इंस्टॉलेशन के माध्यम से यह संदेश दिया कि देश का डेयरी सेक्टर और बीफ निर्यात एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। 56 दुकान पर मौजूद भीड़ को संबोधित करते हुए यूट्यूबर और एनिमल राइट्स एडवोकेट सुरेश ने आगाह किया कि इंदौर और मालवा के कई हिस्से पहले से ही भीषण जल संकट और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मात्र एक लीटर दूध के उत्पादन के लिए करीब 1,078 लीटर पानी की बलि दी जा रही है। वहीं, एनिमल एडवोकेट दुर्गा ने कहा कि डेयरी सप्लाई चैन में जानवरों की जो यात्रा शुरू होती है, उसका अंत अक्सर बीफ उद्योग की कसाईखानों में होता है। युवाओं ने कौन बनेगा करोड़पति की उस वायरल क्लिप का भी हवाला दिया जिसमें सिद्धार्थ शर्मा की बातों ने महानायक अमिताभ बच्चन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया था। आंकड़ों की नजर से देखें तो मध्य प्रदेश दूध उत्पादन में भले ही तीसरे पायदान पर हो, लेकिन इसकी पर्यावरणीय कीमत रेड जोन में पहुंच गई है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं ने बताया कि डेयरी और स्लॉटरहाउस प्रदूषण फैलाने वाली सबसे गंभीर श्रेणी में शामिल हैं। राज्य से हर साल निकलने वाली 11.9 लाख टन मीथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को और अधिक गहरा रही है। युवाओं ने सरकार और समाज से अपील की है कि वे इस नैतिक और पर्यावरणीय चुनौती का स्थाई समाधान तलाशें ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों को बचाया जा सके। प्रकाश/04 मई 2026