वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा मिल्की वे में जमी हुई बर्फ के विशाल भंडार का पता लगाया है। यह बर्फ पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड का एक जटिल मिश्रण है, जो अंतरिक्ष में मौजूद सूक्ष्म धूल के कणों पर जमा है। यह खोज न केवल हमें यह समझने में मदद करेगी कि पृथ्वी पर पानी कैसे आया, बल्कि यह भी कि ब्रह्मांड में जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी तत्व कैसे बनते हैं और फैलते हैं। इस असाधारण खोज का श्रेय नासा के खास स्पेस टेलिस्कोप स्फेरेएक्स (स्पेक्ट्रो-फोटोमीटर फॉर द हिस्ट्री ऑफ द यूनिवर्स, एपोक ऑफ रीआयोनाइजेशन एंड आइस एक्सप्लोरर) को जाता है, जिसे 11 मार्च, 2025 को लॉन्च किया गया था। यह टेलिस्कोप इंफ्रारेड लाइट का उपयोग करके पूरे आकाश को स्कैन करता है और रसायनों के फिंगरप्रिंट को पहचान कर बता देता है कि सैकड़ों प्रकाश वर्ष दूर धूल के कणों पर कौन से अणु जमे हैं। स्फेरेएक्स ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर इन बर्फीले क्षेत्रों का मैप तैयार किया है, जिससे हमारी आकाशगंगा में जीवन के निर्माण के लिए जरूरी तत्वों का वितरण स्पष्ट हुआ है। 2025 के अंत तक इसने अपना पहला 3डी मैप पूरा कर लिया था, जिसने वैज्ञानिकों को एक नई दृष्टि दी है। वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा के विशाल आणविक बादलों के भीतर धूल के कणों पर बर्फ की मोटी परतें देखी हैं, जो मोमबत्ती की कालिख से भी छोटी होती हैं। मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक फिल कोर्नगुट के अनुसार, ये बर्फीले क्षेत्र इंटरस्टेलर ग्लेशियर की तरह काम करते हैं। जब कोई नया सौर मंडल जन्म लेता है, तो ये ग्लेशियर उसे पानी की भारी आपूर्ति कर सकते हैं। यह एक क्रांतिकारी विचार है कि हमारी पृथ्वी पर मौजूद विशाल महासागरों का पानी शायद अरबों साल पहले इन्हीं ठंडे अंतरिक्षीय भंडारों से आया होगा। यह साबित करता है कि जीवन के लिए जरूरी घटक ब्रह्मांड में कोई संयोग नहीं, बल्कि तारों के बनने की प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। पहले जेम्स वेब या स्पिट्जर जैसे टेलिस्कोप एक समय में छोटे क्षेत्र या खास तारे पर ही फोकस करते थे, लेकिन स्फेरेएक्स ने पूरे आकाशगंगा का एक व्यापक 3डी मैप तैयार किया है। हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन के खगोलशास्त्री जोसेफ होरा बताते हैं कि अब स्फेरेएक्स पूरे गैलेक्टिक प्लेन में फैली बर्फ को विस्तार से देखने में सक्षम है, चाहे पीछे कोई चमकता तारा हो या न हो। सीएफए के खगोलशास्त्री गैरी मेलनिक के अनुसार, यह टेलिस्कोप विभिन्न वातावरणों में बर्फ के बनने और टूटने की दर को समझने में भी मदद कर रहा है, जिससे हमें यह जानने में सहायता मिलेगी कि किस तरह के तारों के पास पानी वाले ग्रह बनने की संभावना सबसे अधिक होती है। ग्रहों के निर्माण में धूल और बर्फ की जुगलबंदी महत्वपूर्ण है। धूल के कणों पर बर्फ की परत चढ़ी होने से वे आसानी से चिपकते हैं, जिससे धीरे-धीरे कंकड़, चट्टान और अंत में एक पूरा ग्रह बनता है। पर्याप्त बर्फ की उपस्थिति पृथ्वी जैसे वॉटर वर्ल्ड का निर्माण कर सकती है। नासा की यह नई मैपिंग हमें उन जगहों की पहचान करने में मदद कर रही है जहां भविष्य में नए नीले ग्रह जन्म ले सकते हैं। यह खोज हमें जीवन की तलाश के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर ले आई है, जिससे आने वाले दशकों तक खगोलविदों के लिए रिसर्च का आधार मजबूत होगा। सुदामा/ईएमएस 05 मई 2026