-स्टडी से खुलासा, अधूरी नींद और स्लीप डिसऑर्डर से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ीं नई दिल्ली,(ईएमएस)। देर रात तक मोबाइल और टीवी देखने की आदत अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। एक हालिया मेडिकल अध्ययन में सामने आया है कि अधूरी नींद और स्लीप डिसऑर्डर के कारण अस्थमा और एलर्जी जैसी बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, भागलपुर के डॉक्टरों द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम और नींद की कमी युवाओं और बच्चों दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। अस्पताल की ओपीडी में आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों में नींद की समस्या के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी के लक्षण एक साथ देखे गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह शोध मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी और टीबी एवं चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र कुमार शर्मा के नेतृत्व में किया गया। बीते साल जनवरी से जून के बीच कुल 6,753 मरीजों की जांच की गई, जिसमें करीब 63 प्रतिशत मरीज ऐसे पाए गए, जिन्हें नींद की समस्या के साथ अस्थमा और एलर्जी दोनों थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, देर रात तक स्क्रीन देखने से शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होती है। इससे शरीर में सूजन बढ़ाने वाली प्रक्रियाएं सक्रिय हो जाती हैं, जो श्वसन तंत्र पर नकारात्मक असर डालती हैं। यही कारण है कि अब कम उम्र के बच्चों और किशोरों में भी अस्थमा और एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर जारी आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 36 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे रात में स्क्रीन टाइम सीमित करें, नियमित और पर्याप्त नींद लें तथा संतुलित दिनचर्या अपनाएं। उनका कहना है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव कर अस्थमा और एलर्जी जैसी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हिदायत/ईएमएस 05मई26