लेख
06-May-2026
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वो चुनाव नहीं हारी हैं इसलिए इस्तीफ़ा नहीं देंगी।ऐ कहना ठीक नहीं है पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली हार ने ममता बनर्जी के आगे की राजनीतिक सफर को काफी मुश्किलों भरा बना दिया है। ममता बनर्जी ने सिर्फ सत्ता ही नहीं गंवायी बल्कि अपनी परंपरागत सीट भवानीपुर को भी हार गईं अब ऐ कहना काउंटिंग में धांधली हुई है इसलिए इस्तीफा नहीं दूंगी गलत है ऐ लोकतान्त्रिक देश है इसमें जनता का निर्णय सर्वोपरि है पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद हिंसा होना बिल्कुल गलत है ऐ राज्य सरकार की जिम्मेदारी है अतः ऐसी घटना को शक्ति से पालन करना चाहिए और क़ोई भी पार्टी का हो दंगा करने पर उचित कार्यवाही करना चाहिए इस चुनाव में कांग्रेस और टीएमसी में वोट कटा है रही सही कसर लेफ्ट और एआईएमआईएम ने भी वोट काटा है इस चुनाव में सबसे ज्यादा खुश कांग्रेस हुई होगी क्योंकि विपक्ष में ममता दीदी का बढ़ता कद को देखकर कांग्रेस चिंता में थी अब विपक्ष में कांग्रेस एक बड़ी पार्टी बनी है भले ही सीटों की संख्या कम हो लेकिन अधिक मात्रा में अल्पसंख्यक का वोट काटा है लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सर्वोपरि है और उसका सम्मान करना चाहिए और हार को स्वीकार कर विपक्ष में ही सही जनता के निर्णय को सम्मान करना चाहिए लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें देश की सत्ता जनता के हाथों में होती है। इसमें नागरिक अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और वे प्रतिनिधि जनता के हित में शासन चलाते हैं। सरल परिभाषा: लोकतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें जनता को अपने शासकों को चुनने का अधिकार होता है। सत्ता का अंतिम स्रोत जनता होती है। प्रतिनिधियों का चुनाव निश्चित अंतराल पर होता है। समानता: सभी नागरिकों को कानून के सामने समान अधिकार प्राप्त होते हैं। स्वतंत्रता: विचार, अभिव्यक्ति, धर्म, और संगठन की स्वतंत्रता होती है। कानून का शासन: सभी नागरिक और शासक कानून के अधीन होते हैं। बहुमत का शासन, अल्पमत का सम्मान करना ही लोकतंत्र की ताकत है जिसमें निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं, लेकिन अल्पमत के अधिकारों की रक्षा की जाती है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता भी शामिल है जो न्यायालय स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं। जहाँ तक उत्तरदायित्व और पारदर्शिता का सवाल है वो चुनाव से पहले होता है जिसमें शासक जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं और शासन में पारदर्शिता होती है। यानी व्यावहारिक अर्थ जनता की संप्रभुता की रक्षा करना है : नागरिक ही सरकार को बदल देती हैं। चुनाव हर 5 साल में चुनाव होते हैं तो अगली बार के लिए कहाँ कहाँ गलती हुई इसपर ध्यान देकर विपक्ष में भी रहकर जनता की सेवा करने से पुनः चुनाव में जीत हो सकती है । जाति, धर्म, लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए । कोई भी अपनी राय रख सकता है, संगठन बना सकता है। कानून का शासन: कोई भी कानून से ऊपर नहीं। बहुमत का शासन, अल्पमत का सम्मान: बहुमत से सरकार बनती है, लेकिन अल्पमत की बात भी सुनी जाती है। उत्तरदायित्व और पारदर्शिता: सरकार को अपने कार्यों का हिसाब देना पड़ता हैलोकतंत्र की न्यूनतम विशेषताएँ हैं: जनता की संप्रभुता, समानता, स्वतंत्रता, कानून का शासन, और उत्तरदायित्व। इनसे ही किसी शासन को लोकतांत्रिक कहा जा सकता है।अगर लगता है की काउंटिंग में कुछ गड़बरी हुई है तो अदालत है जिसमें न्यायपालिका के सामने अपनी बात रखने का अधिकार है जो अदालतें सरकार के दबाव में नहीं होतीं। इसलिए अब चुनाव परिणाम आने के बाद कुछ नहीं हो सकता है और जिसके जितना अधिक सीटे आई हैं वो अपना विधायक दल का नेता चुना जाएगा और राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे और विधायक दल की संख्या के आधार पर राज्यपाल उसे सरकार बनाने के लिए शपथ भी दिला देगी वो भी राज्यभवन में जैसा एक बार महाराष्ट्र के चुनाव के बाद देवेंद्र फरनवीस और एनसीपी के नेता स्व अजीत पवार ने शपथ लिया बाद में बहुमत नहीं होने के कारण देवेंद्र फरनवीस को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था पश्चिम बंगाल में कुछ ही दिनों में 5 साल पूर्ण होने पर विधानसभा भंग हो जाएगी बाद में नए विधायक सदन में प्रोटम स्पीकर द्वारा शपथ लेंगे अतः यहाँ कहीं भी दुविधा नहीं है क्योंकि जीते गए विधायक को चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद निर्वाचन अधिकारी जीते हुए प्रत्याशी को प्रमाण पत्र देती है चुनाव से जुड़े सभी इंतज़ाम चुनाव आयोग करता है। चुनाव आयोग मतदान केंद्र बनाता है, जहाँ चुनाव के दिन लोग आकर अपना वोट डालते हैं। सिर्फ़ वही लोग वोट डाल सकते हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट में होता है। वोट डालने के बाद, सभी वोटों को एक सुरक्षित जगह पर रखा जाता है और इन्हें सिर्फ़ वोटों की गिनती वाले दिन ही खोला जाता है। इस तरह, जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं, वह चुनाव जीत जाता है। यह प्रक्रिया सभी चुनावों में, सभी निर्वाचन क्षेत्रों और वार्डों में दोहराई जाती है। अतः काउंटिंग के समय जो विपक्ष के एजेंट होते है चुनाव के दिन जो फॉर्म सी होता है उसको लेकर काउंटर पर काउंटिंग के दिन आते हैं और सभी चीजों जैसे ईवीएम का नम्बर विविपैड इलक्ट्रोल वोट की संख्या आदि का मिलान करते हैं हर घंटे राउंडिंग टेबल पर हर बूथ का ईवीएम से रिजल्ट देखा जाता है और हर घंटे ऐ क्रम चलता है और रिटर्निंग अफसर टेबलेटिंग अफसर को वो सीट देता है जिसे वो इलेक्शन कमीशन को ऑनलाइन भेजता है और तब जाकर रिजल्ट आता है और ऐ सभी सीसीटीवी की निगरानी में होता है अतः एक बार इलेक्शन कमीशनर द्वारा कैंडिडेट को जीत की घोषणा के बाद कुछ नहीं हो सकता है बाद में मिडिया में नहीं अदालत में गड़बड़ी की याचका दायर कर सकते है जो अदालत निर्णय देती है वो इलेक्शन में अगर धांधली हुई है तो सबूत के आधार पर ही अपने विवेक का इस्तेमाल कर क़ोई निर्णय देती है प्रायः इलेक्शन कमीशनर के निर्णय को ही जायज माना जाता है इसलिए अब जब चुनाव परिणाम आ गए हैं तो कुछ नहीं हो सकता है राज्यपाल तुरंत ही बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का आदेश देगी और शपथ दिला देगी क्या करेंगे यदि इस्तीफा नहीं दि तो राज्यपाल तो खेल कर देंगे अतः इस्तीफा दे देना चाहिए और जनता के निर्णय को सम्मान करना चाहिए क्योंकि ऐसे भी बीजेपी अपना सरकार बना लेगी और उस समय इस्तीफा ना देने पर बेबजह मीडिया में नाम ख़राब होगा और मीडिया में बोलने से नहीं बल्कि अदालत ही क़ोई निर्णय दे सकती है। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) ईएमएस / 06 मई 26