राष्ट्रीय
06-May-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक पनीर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है। कम पोषण और सेहत के लिए हानिकारक इस दिखावटी पनीर को उपभोक्ताओं की सुरक्षा के मद्देनजर बाजार से बाहर किया जाएगा। मामले से जुड़े उच्चाधिकारियों के अनुसार, एक हाई लेवल कमेटी ने अक्टूबर 2025 में इस प्रस्ताव को तैयार किया था, जिसे मार्च 2026 की बैठक में आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। समिति का तर्क है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक देश है, फिर भी यहां बड़ी मात्रा में सस्ता और मिलावटी सिंथेटिक पनीर बेचा जा रहा है। यह दिखने और स्वाद में असली पनीर जैसा होता है, जिससे आम ग्राहक भ्रमित हो जाते हैं। लाइसेंस लेकर 1 हजार कंपनियां बना रहीं हैं सिंथेटिक पनीर वर्तमान में देश में लगभग 1,000 कंपनियों के पास इसे बनाने का लाइसेंस है। नई नीति के तहत अब नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे और मौजूदा कंपनियों को अपना स्टॉक खत्म करने व उत्पादन बंद करने के लिए पर्याप्त समय देते हुए इसे चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।बाजार में सिंथेटिक पनीर का चलन तेजी से बढ़ा है क्योंकि यह एक सस्ता विकल्प है। इसे ताजे दूध की जगह मुख्य रूप से पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और इमल्सीफायर्स के मिश्रण से तैयार किया जाता है। असली ब्रांडेड पनीर जहां 450 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, वहीं यह सिंथेटिक पनीर 250 से 300 रुपये में उपलब्ध हो जाता है। सस्ता होने के कारण रेस्तरां और ढाबों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, जो उपभोक्ताओं के साथ धोखा है। बाजार का विस्तार और स्वास्थ्य पर खतरा मार्केट रिसर्च कंपनी आईएमएआरसी के अनुसार, भारत का पनीर बाजार वर्तमान में 10.8 अरब डॉलर का है, जिसके 2033 तक 22.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इतने बड़े बाजार में शुद्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सिंथेटिक पनीर में प्रोटीन नगण्य और वसा (फैट) अत्यधिक होती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध पैदा हो सकता है, जो सीधे तौर पर टाइप-2 डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। सरकार के इस कड़े कदम से डेयरी उद्योग में पारदर्शिता आने और आम जनमानस के स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है। वीरेंद्र/ईएमएस/06मई 2026