राज्य
06-May-2026


इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकल पीठ ने धार डिप्टी कलेक्टर वीरेंद्र कुमार कटारे के खिलाफ जारी चार्जशीट और उससे जुड़ी सभी विभागीय कार्यवाही रद्द कर सरकार को निर्देश दिया है कि उनके नाम पर जॉइंट कलेक्टर पद के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में पुनर्विचार किया जाए। पदोन्नति पर विचार करते समय रद्द की गई कार्यवाही का कोई प्रभाव नहीं डाला जाएगा। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन न्यायिक अधिकारी के रूप में किया था, इसलिए केवल आदेश में त्रुटि के आधार पर विभागीय कार्रवाई उचित नहीं है। वर्ष 2013 में रतलाम तहसीलदार के पद पर रहते कटारे ने जमीन से जुड़े एक मामले में कुर्की, नीलामी और नामांतरण संबंधी आदेश पारित किए थे। इस आदेश पर ही 25 जून 2019 को विभाग ने उनके खिलाफ चार्जशीट जारी की थी जिसके खिलाफ कटारे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका सुनवाई दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2013 में रतलाम में तहसीलदार रहते हुए उन्होंने जोर आदेश पारित किए थे उन पर 6 साल बाद 25 जून 2019 को विभाग ने उनके खिलाफ चार्जशीट जारी करते आरोप लगाया कि उन्होंने नीलामी प्रक्रिया में हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन और पक्षपात किया। याचिका सुनवाई दौरान सरकार की ओर से तर्क रखे कि उन्होंने अपने आदेश के जरिए एक पक्ष को लाभ पहुंचाया। आदेश में अनियमितताएं मिलने के बाद चार्जशीट जारी की गई थी। जिस पर कटारे की ओर से तर्क रखे गए कि चार्जशीट में जिन आदेशों को लेकर जो आरोप लगाए हैं, वे सभी उन्होंने क्वासी-ज्यूडिशियल अधिकारी के रूप में दिए थे, इसलिए उन्हें जजेस प्रोटेक्शन एक्ट के तहत संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में केवल आदेश में गलती होने से विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती। आरोप बिना आधार के है। कटारे के तर्कों से सहमत होकर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उन्हें क्वासी-ज्यूडिशियल कार्यों के लिए कानूनी संरक्षण प्राप्त है। केवल निर्णय में त्रुटि के आधार पर विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती। दुर्भावना, गंभीर लापरवाही या भ्रष्टाचार के स्पष्ट आरोप होने चाहिए। चार्जशीट 6 साल की देरी से जारी करना भी अनुचित है। जिसके बाद कोर्ट ने जारी चार्जशीट और उससे जुड़ी सभी विभागीय कार्यवाही रद्द कर सरकार को उक्त निर्देश दिये। आनंद पुरोहित/ 06 मई 2026