राष्ट्रीय
06-May-2026


उज्जैन (ईएमएस)। साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ से पहले शिप्रा नदी के करीब प्रस्तावित निर्माण गतिविधियों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने दो टूक कहा कि शिप्रा नदी के किनारे किसी भी प्रकार की कारोबारी गतिविधि को अनुमति नहीं दी जा सकती। विशेष रूप से, नदी तट से 100 से 200 मीटर के दायरे में प्रस्तावित रिसॉर्ट निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह फैसला उज्जैन निवासी सत्यनारायण द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें मास्टर प्लान के प्रावधानों का उल्लंघन कर हो रहे अवैध निर्माणों को चुनौती दी गई थी। पूर्व में, हाईकोर्ट ने नगर निगम और राज्य शासन को 200 मीटर क्षेत्र में अवैध और अनाधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। मंगलवार को हुई सुनवाई में, उज्जैन नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया कि अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई जारी है, कुछ अतिक्रमण हटाए गए हैं और कुछ को नोटिस जारी किए गए हैं। सुनवाई के दौरान मेला को ध्यान में रखकर बनाई गई रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना का भी उल्लेख हुआ। इस योजना के तहत, नदी से 100 मीटर क्षेत्र में घाट विकास और सुंदरीकरण जैसे गैर-व्यावसायिक कार्य प्रस्तावित हैं, जिन्हें कोर्ट ने सैद्धांतिक रूप से इजाजत योग्य माना। हालांकि, 100 से 200 मीटर के दायरे में आश्रम, मठ, प्रवचन हॉल, धर्मशालाओं के साथ-साथ प्रस्तावित रिसॉर्ट जैसी कारोबारी गतिविधियों को लेकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नदी किनारे रिसॉर्ट जैसे व्यावसायिक निर्माण को स्वीकार करना संभव नहीं है। अगली सुनवाई तक, इस 100 से 200 मीटर क्षेत्र में किसी भी प्रकार के रिसॉर्ट या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह निर्णय सिंहस्थ की तैयारियों में शामिल उन योजनाओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिनमें शिप्रा तट के व्यावसायिक उपयोग की परिकल्पना की गई थी। आशीष दुबे / 06 अप्रैल 2026