क्षेत्रीय
06-May-2026
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- पॉच सालो में 1 हजार से अधिक वन्य जीवो के शिकार की आंशका - कोड वर्ड में तय होता था शिकार का प्लान - रिटायर्ड रेंजर से जुड़ी शिकारियो की कड़िया भोपाल(ईएमएस)। वन विभाग द्वारा गुना के बीनागंज में भोपाल के शिकारियों को दबोचने के मामले में गिरोह अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा होने के साथ ही कई और सनसनीखेज खुलासे हुए है। हिरण, नीलगाय और सांभर का शिकार कर उनका मांस भोपाल में स्टोर किया जाता और बाद में इसे देश के कई शहरों के साथ दुबई तक सप्लाई किया जाता था। जांच में सामने आया है, कि शिकारी गिरोह बीते लंबे समय से सक्रिय था, और रायसेन, गुना, नर्मदापुरम, नजीराबाद, सिरोंज के जंगलों में हर सप्ताह कई बार शिकार करता था। आंशका है की आरोपियो ने बीते पांच साल में करीब 1 हजार से अधिक वन्य जीवो का शिकार किया है। - कोड वर्ड में तय होता था शिकार का प्लान शिकार के लिये घूमने चलना, हिरण के लिये घोड़ा, ब्लैक बक के लिये कुत्ता, नील गाय के लिए हाथी था कोड पूछताछ में सामने आया की गिरोह बातचीत के लिये कोड वर्ड की भाषा का इस्तेमाल करता था। हिरण के लिए घोड़ा, नील गाय के लिए हाथी और काला हिरण (ब्लैक बग) के लिए कुत्ता कोड वर्ड इस्तेमाल होता था। शिकार पर जाने के लिये घूमने चलेंगे जैसै कोड वर्ड प्रयोग किया जाता था। वहीं शिकारी बंदूक के लिए माचिस और कारतूसों के लिए तीली कोड वर्ड का उपयोग करते हैं। बताया गया है की गिरोह के टारगेट पर सबसे ज्यादा ब्लैक बग रहता था, क्योकि इसकी डिमांड सबसे अधिक रहती है, और इसका मांस भी सबसे महंगा करीब 800 रुपए प्रति किलो तक बिकता है। - विदेशो से सप्लाई के भी जुड़ रहे तार सूत्रो की मानी जाये तो छानबीन में यह भी पता चला है की शिकार के मांस को देश के कई शहरों जैसे मुंबई, पुणे और दक्षिण भारत के साथ दुबई तक सप्लाई किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का केंद्र भोपाल बना हुआ था। - रिटायर्ड रेंजर से जुड़ी शिकारियो की कड़िया शिकार गिरोह के संपर्क में वन विभाग का रिटायर्ड रेंजर नियामत भी था। जॉच में सामने आया की वह शिकारियों को लोकेशन और तरीके बताने के साथ मांस की खरीद-फरोख्त में मदद करता था। वहीं जांच में उसके और शिकार गिरोह के बीच बैंक ट्रांजेक्शन के साक्ष्य भी मिले हैं। हालांकि टीम इस बिंदु पर और भी जॉच कर रही है। - होटल कारोबारियों भी थे खरीददार, पुरानी गाड़ियो से करते थे शिकार सूत्रो के अनुसार शिकार गिरोह पुराने और तय ग्राहकों को ही मांस सप्लाई करते थे। भोपाल के कुछ होटल कारोबारियों से भी इनके संपर्क थे। वन विभाग और पुलिस की नजरो से बचने के लिए शातिर आरोपी शिकार और परिवहन के लिए ऐसी सेकंड हैंड गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे, जो बिकने के लिए आती थीं। टीम आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल भी खंगाल रही है। - वन विभाग की होटलो पर संर्चिग जारी सूत्रो के मुताबिक टीम को जानकारी लगी की वन्यजीवों का शिकार कर उनका मांस शहर के होटलों, फार्महाउस पार्टियों और अन्य स्थानों पर सप्लाई किया जाता था। इसके बाद टीम ने इस कनेटवर्क में जुटे लोगो की पहचान जुटाने की जांच तेज कर दी है। कार्यवाही के चलते पुराने शहर के बुधवारा, जिन्सी, पीरगेट से लेकर शाहजहांनाबाद के होटलों में छापामार कार्यवाही की गयी। मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम ने शहर के होटलों और संदिग्ध स्थानों पर सघन जांच की है। जॉच के दौरान संदिग्ध नजर आये मांस के नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। - दूरबीन लगी बंदूक, छुरियां, बका, जिंदा कारतूस सहित मांस हुआ था बरामद गौरतलब है की वन विभाग की टीम ने भोपाल से सटे बीनागंज के जंगली क्षेत्रों में वन्यजीवों के शिकार और मांस बिक्री के मामले में पिछले दिनों पांच शिकारियों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान एमपी-09 सीके 8520 नंबर की कार से वन्यजीवों का मांस और हथियार बरामद किए गए। जब्त सामान में दूरबीन लगी सिंगल नाल बंदूक, तीन छुरियां, एक बका, एक शार्पनर और सात जिंदा कारतूस शामिल हैं। फिलहाल वन विभाग पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटा है। जुनेद / 6 मई