ग्वालियर ( ईएमएस ) | ग्वालियर सहित म.प्र. में लाखों मरीज, जिन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मेडिकल इंश्योरेंस लिया हुआ है, आज उसी व्यवस्था के कारण भारी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक पीड़ा झेलने को मजबूर हैं। इस अत्यंत गंभीर और जनहित से जुड़े विषय पर कैट के राष्ट्रीय संगठन मंत्री भूपेन्द्र जैन ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को एक विस्तृत पत्र लिखकर अस्पतालों से डिस्चार्ज के समय टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर), बीमा कंपनियों एवं अस्पतालों के बीच होने वाली अनावश्यक देरी को समाप्त करने हेतु तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। श्री जैन ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, महंगे बीमा प्रीमियम और कैशलेस इलाज की व्यवस्था के बावजूद यदि मरीज को अस्पताल से छुट्टी पाने के लिए घंटों या पूरा दिन प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इलाज पूरा होने और डॉक्टर द्वारा फिट घोषित किए जाने के बाद भी मरीजों को केवल फाइलों, ई-मेल, दस्तावेजों और औपचारिक अनुमोदनों के नाम पर अस्पतालों में रोके रखना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल असुविधा का विषय नहीं है बल्कि एक गंभीर मानवीय और सामाजिक मुद्दा है। अस्पतालों में अतिरिक्त घंटों तक रुकने के कारण मरीजों को अतिरिक्त बेड चार्ज, दवाइयों एवं अन्य खर्चों का बोझ भी उठाना पड़ता है। दूर-दराज़ से आए परिवारों को यात्रा, रहने और भोजन की अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और गंभीर बीमारी से उबर रहे मरीजों के लिए यह प्रतीक्षा और भी अधिक पीड़ादायक हो जाती है। श्री जैन ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा और कैशलेस इलाज की व्यवस्था का मूल उद्देश्य मरीज को राहत और सुरक्षा देना था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में मरीज अस्पताल, बीमा कंपनी और टीपीए के “कुचक्र” में फंस जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल डिस्चार्ज प्रक्रिया समय रहते शुरू नहीं करते, टीपीए बार-बार नए दस्तावेज मांगते हैं और बीमा कंपनियां स्पष्ट जवाबदेही से बचती हैं।