अंतर्राष्ट्रीय
08-May-2026
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तेहरान(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने वैश्विक स्तर पर लगाए गए 10 प्रतिशत के आयात शुल्क (टैरिफ) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि 24 फरवरी 2026 को लागू किया गया यह टैरिफ 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत कानूनी रूप से उचित नहीं है। यह नया आयात शुल्क उस समय लगाया गया था जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के पिछले व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह नया टैरिफ वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को दरकिनार करने की एक कोशिश थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लगाए गए 2025 के टैरिफ को खारिज कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने अपने फरवरी के आदेश में इस धारा का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि यह भुगतान संतुलन घाटे को ठीक करने या डॉलर के मूल्य में गिरावट को रोकने के लिए 150 दिनों तक शुल्क लगाने की अनुमति देता है। हालांकि, अदालत ने गुरुवार को अपने फैसले में पाया कि जिन व्यापार घाटों का जिक्र ट्रंप ने किया था, उन्हें ठीक करने के लिए यह कानून एक उपयुक्त कदम नहीं था। इस फैसले के बावजूद कुछ क्षेत्रों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ प्रभावी रहेंगे क्योंकि वे इस विशेष कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के दायरे में नहीं आते हैं। अब इस बात की प्रबल संभावना है कि अमेरिकी न्याय विभाग फेडरल कोर्ट के इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। फिलहाल, इस अदालती आदेश ने वैश्विक व्यापार और अमेरिकी बाजारों के लिए एक नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। वीरेंद्र/ईएमएस/08मई 2026