पोप से चर्चा के बाद संबंध सुधरने के आसार वेटिकन(ईएमएस)। अमेरिका और वेटिकन के बीच हाल के दिनों में उपजे कड़वाहट भरे संबंधों को सुधारने के लिए विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बड़ा कूटनीतिक मोर्चा संभाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पोप के खिलाफ की गई तीखी बयानबाजी और दोनों पक्षों के बीच बढ़ते वैचारिक मतभेदों के बीच, रूबियो एक शांतिदूत की भूमिका में वेटिकन सिटी पहुंचे। इस उच्चस्तरीय मुलाकात का प्रभाव इतना गहरा रहा कि पोप लियो न केवल रूबियो के तर्कों से प्रभावित नजर आए, बल्कि दोनों के बीच चर्चा इतनी लंबी खिंच गई कि वेटिकन का पूर्व निर्धारित आधिकारिक शेड्यूल ही बदलना पड़ गया। अपोस्टोलिक पैलेस में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के संघर्ष और वैश्विक शांति पर गहन चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट द्वारा जारी संक्षिप्त बयान के अनुसार, 30 मिनट के लिए तय की गई यह मुलाकात काफी सकारात्मक रही। बैठक में पश्चिमी गोलार्ध से जुड़े साझा हितों, शांति बहाली और मानव गरिमा की रक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से बात की गई। रूबियो के इस दौरे को अमेरिका और होली सी के बीच उन मजबूत ऐतिहासिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले कुछ महीनों से तनावपूर्ण थे। चर्चा लंबी चलने के कारण पोप अपने अगले कार्यक्रम में करीब 40 मिनट की देरी से पहुंचे, जो इस संवाद की गंभीरता को दर्शाता है। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप और पोप लियो के बीच हाल के महीनों में कई मुद्दों पर टकराव देखा गया है। अमेरिका की कड़ी इमीग्रेशन नीतियों और ईरान के प्रति सख्त सैन्य रुख की पोप ने समय-समय पर आलोचना की है। इसके जवाब में ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि पोप का रुख कई कैथोलिक अनुयायियों को खतरे में डाल रहा है। हालांकि, रूबियो के साथ बैठक के दौरान माहौल काफी बदला हुआ नजर आया। पोप ने स्पष्ट किया कि कैथोलिक चर्च का मिशन हमेशा से शांति और सुसमाचार का प्रचार करना रहा है और वे लंबे समय से परमाणु हथियारों के प्रसार के विरोधी रहे हैं। इस दौरान पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी पोप से मुलाकात की और दुनिया को अराजकता से बचाने के लिए एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। रूबियो का यह दौरा तनाव कम करने की दिशा में एक सफल कदम माना जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/08मई 2026