- “कलेक्टर केवल भूमि प्रशासन तक सीमित न रहें, जिले के सर्वांगीण विकास के सच्चे नेतृत्वकर्ता बनें” गांधीनगर (ईएमएस)| हर्ष संघवी की अध्यक्षता में त्रिमंदिर अडालज में आयोजित तीन दिवसीय राजस्व विभाग चिंतन शिविर का समापन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले पांच महीनों में विभाग द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की और कहा कि राजस्व विभाग ने पारदर्शिता तथा टीमवर्क के साथ चुनावी और प्रशासनिक कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस चिंतन शिविर से वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय विकसित होगा तथा नई तकनीक के माध्यम से नागरिकों को अधिक तेज और प्रभावी सेवाएं मिल सकेंगी। संघवी ने कहा कि “कलेक्टर” पद को केवल भूमि सुधार और भूमि प्रशासन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें जिले के वास्तविक प्रमुख के रूप में कार्य करना चाहिए। - “प्रशासनिक बदलाव का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे” डिप्टी सीएम ने अधिकारियों से लोकाभिमुख दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रशासनिक परिवर्तन तभी सार्थक होगा जब उसका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सेवा के दौरान ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे सेवानिवृत्ति के समय लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का आत्मसंतोष प्राप्त हो। जिलों के आर्थिक विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने पर्यटन और उद्योग क्षेत्रों में कलेक्टर कार्यालयों की अधिक सक्रिय भूमिका की आवश्यकता बताई। साथ ही एमएसएमई इकाइयों और निवेशकों के लिए जिला स्तर पर बेहतर व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों के सीएसआर फंड का उपयोग पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों के विकास में सुनिश्चित करना भी जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। - कानून-व्यवस्था, स्वच्छता और टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर संघवी ने कानून-व्यवस्था के संदर्भ में अधिकारियों को निर्देश दिया कि असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण के लिए ‘पासा’ और ‘तड़ीपार’ जैसे मामलों में पुलिस अधिकारियों की राय सुनकर कड़े निर्णय लिए जाएं। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों के शौचालय और परिसर निजी संस्थानों से भी अधिक स्वच्छ होने चाहिए, ताकि जनता में प्रशासन की सकारात्मक छवि बने। डिप्टी सीएम ने प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग मोबाइल ऐप बनाने के बजाय राज्य स्तर पर एक “कॉमन ऐप” विकसित करने और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने का सुझाव दिया। साथ ही खाद्य सामग्री बेचने वाले ठेलों पर स्वच्छता नियमों और ग्लव्स के उपयोग को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया। - टेक्नोलॉजी आधारित पारदर्शी शासन की दिशा में आगे बढ़ रहा राजस्व विभाग राजस्व विभाग की चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. जयंती रवि ने कहा कि राज्य में नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और प्रभावी शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए राजस्व विभाग तकनीक आधारित सुधारों को तेजी से लागू कर रहा है। उन्होंने बताया कि भूमि संबंधी सेवाओं के नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत गैर-कृषि (एनए) प्रक्रिया को और सुगम बनाने पर विशेष चर्चा हुई। शहरी और ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड के बेहतर प्रबंधन हेतु “इंस्पेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स” के नए पद सृजित कर डिजिटाइजेशन और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। * निवेशकों के लिए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था जरूरी उद्योग एवं खनन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा ने कहा कि ‘विकसित गुजरात’ के विजन को साकार करने में राजस्व विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विभिन्न जिलों द्वारा उद्योगों के लिए भूमि बैंक उपलब्ध कराने और नई जीआईडीसी परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन में दिखाई गई सकारात्मकता की सराहना की। उद्योग आयुक्त पी. स्वरूप ने कहा कि जिला प्रशासन सरकार का चेहरा होता है और उसकी वास्तविक पहचान आम जनता से जुड़े कार्यों से बनती है। उन्होंने ई-धरा और जनसेवा केंद्रों की सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं तेज बनाने पर विशेष बल दिया। - 08 मई