* मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्यभर में जागरूकता और नि:शुल्क जांच अभियान तेज गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि को ध्यान में रखते हुए ‘थैलेसीमिया मुक्त गुजरात’ संकल्प के तहत व्यापक जनजागरूकता एवं निदान अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के मार्गदर्शन और स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया के नेतृत्व में यह अभियान राज्यभर में प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसे समय पर जांच और उचित सावधानी द्वारा रोका जा सकता है। इस बीमारी में शरीर में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कण नहीं बन पाते, जिससे गंभीर एनीमिया की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। राज्य सरकार द्वारा गुजरात की सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सिविल अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं एवं युवाओं के लिए थैलेसीमिया जांच की सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, थैलेसीमिया मरीजों के लिए आवश्यक ‘डेफेरासिरॉक्स’ टैबलेट और ‘डिफेरॉक्सामिन’ इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। * थैलेसीमिया मेजर बच्चों के लिए मजबूत उपचार व्यवस्था ‘थैलेसीमिया मेजर’ से पीड़ित बच्चों को नियमित रक्त चढ़ाने हेतु राज्य में डे-केयर सेंटर और ब्लड बैंकों के नेटवर्क को और सुदृढ़ बनाया गया है, ताकि मरीजों को उनके निकटतम स्थान पर बेहतर उपचार मिल सके। अस्पतालों में बाल रोग एवं मेडिसिन विभाग के समन्वय से मरीजों की विशेष देखभाल की जा रही है। राज्य की विभिन्न प्रमुख अस्पतालों में वर्तमान में बड़ी संख्या में थैलेसीमिया मरीज उपचार प्राप्त कर रहे हैं - पी.डी.यू. अस्पताल, राजकोट — 484 मरीज जी.जी. अस्पताल, जामनगर — 370 मरीज सर टी. अस्पताल, भावनगर — 166 मरीज सिविल अस्पताल, अहमदाबाद — 195 मरीज नई सिविल अस्पताल, सूरत — 98 मरीज एस.एस.जी. अस्पताल, वडोदरा — 39 मरीज थैलेसीमिया के दो प्रमुख प्रकार थैलेसीमिया माइनर (कैरियर) — इसमें व्यक्ति सामान्यतः स्वस्थ रहता है और विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती। थैलेसीमिया मेजर — यह गंभीर स्थिति होती है, जिसमें बच्चे को जीवनभर नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार, थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों के जन्म को रोकने के लिए विवाह पूर्व अथवा गर्भावस्था की शुरुआती अवस्था में सीबीसी टेस्ट द्वारा स्क्रीनिंग कराना अत्यंत आवश्यक है। * गांव-शहर में जागरूकता अभियान तेज आरोग्य विभाग द्वारा किशोरों, युवाओं और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और सेमिनार के माध्यम से लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने राज्य के नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और विशेष रूप से युवाओं से अपील की है कि वे ‘थैलेसीमिया मुक्त गुजरात’ अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, समय पर जांच करवाएं और सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण में सहयोग करें। सतीश/08 मई