:: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: भारत भवन में तीन दिवसीय ‘प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड’ समारोह का भव्य आगाज :: भोपाल/इन्दौर (ईएमएस)। हिंदी पत्रकारिता के 200 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी के भारत भवन में तीन दिवसीय विशेष समागम प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड का शुभारंभ हुआ। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और वीर भारत न्यास के इस संयुक्त आयोजन के पहले दिन देशभर के विद्वानों ने पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर गहन मंथन किया। अयोध्या से आए मुख्य वक्ता आचार्य मिथिलेश नन्दिनीशरण ने उत्तिष्ठ भारत सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि 200 वर्ष पूर्व पंडित युगलकिशोर शुक्ल ने हिंदुस्तानियों के हित के हेत का जो संकल्प लिया था, वही पत्रकारिता का शाश्वत नरेटिव है। उन्होंने पत्रकारिता की तुलना एक ‘तत्वज्ञ वैद्य’ से की, जो समाज की नब्ज पहचानकर उसे सही दिशा देता है। आचार्य ने पारिवारिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्तित्व निर्माण की असली प्रयोगशाला परिवार ही है और संबंधों को तर्क के बजाय भावना से सींचा जाना चाहिए। :: एआई और डीपफेक तकनीक के ‘स्वर्ण मृग’ :: विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने आधुनिक तकनीक के खतरों के प्रति सचेत किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक को रामायण काल के स्वर्ण मृग की संज्ञा देते हुए विद्यार्थियों को इस मायावी जाल से सावधान रहने की सलाह दी। वहीं, पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने नेशन फर्स्ट का मंत्र देते हुए कहा कि पत्रकारों को किसी भी विचारधारा के बंधन में बंधने के बजाय केवल सत्य को ही सर्वोपरि रखना चाहिए। समारोह के दौरान हिंदी पत्रकारिता के प्रसार में दक्षिण भारत के योगदान पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर माखन के लाल, कार्टून कथा जैसी कृतियों और विद्यार्थियों द्वारा तैयार विशेष समाचार पत्रों प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड, अभ्युदय एवं पहल का लोकार्पण किया गया। वरिष्ठ पत्रकारों ने डिजिटल युग में टीवी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर अपने अनुभव साझा किए। यह समारोह 10 मई तक जारी रहेगा, जिसमें पत्रकारिता के भविष्य पर विभिन्न सत्रों में चर्चा होगी। प्रकाश/08 मई 2026