राज्य
08-May-2026
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:: सांस्कृतिक संध्या : अनेकता में एकता का जीवंत दर्शन, बहुभाषीय प्रस्तुति ने दर्शकों के हृदय में जगाया राष्ट्रप्रेम का गौरव :: भोपाल (ईएमएस)। राजधानी के प्रतिष्ठित कला केंद्र भारत भवन का अंतरंग सभागार उस समय राष्ट्रप्रेम की पावन त्रिवेणी में सराबोर हो गया, जब प्रणाम उदंत मार्तंड समारोह के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक संध्या में सुरों और देशभक्ति का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिला। मंच से जैसे ही वंदे मातरम् की मधुर स्वर लहरियां गूंजना शुरू हुईं, पूरा वातावरण उत्साह और श्रद्धा के गहरे भाव से भर उठा। उमेश तारकसवार के कुशल निर्देशन में कलाकारों ने संगीत और भावना का ऐसा ताना-बाना बुना कि दर्शक आदि से अंत तक मंत्रमुग्ध होकर इस भव्य प्रस्तुति से जुड़े रहे। इस संध्या की सबसे अनुपम विशेषता वंदे मातरम् की बहुभाषीय प्रस्तुति रही, जिसने भाषाई सीमाओं को तोड़कर राष्ट्र की अखंडता का जयघोष किया। जब हिंदी के साथ-साथ तमिल और मलयालम भाषाओं के सुरों में मातृभूमि की वंदना की गई, तो सभागार में उपस्थित प्रत्येक जन ने भारत की अनेकता में एकता की मूल भावना को साक्षात महसूस किया। अलग-अलग भाषाओं में पिरोया गया राष्ट्रप्रेम का यह साझा स्वर सीधे श्रोताओं के दिलों को छू गया। इसी कड़ी में मृदुल घोष की दमदार आवाज में मां तुझे सलाम की ओजस्वी प्रस्तुति ने पूरे माहौल को नई ऊर्जा और स्फूर्ति से भर दिया। इसके उपरांत छीन सकती है नहीं सरकार, वंदे मातरम् जैसे जोश और गौरव से भरे गीतों ने देशभक्ति की भावना को और अधिक प्रखर और प्रदीप्त कर दिया। कलाकारों के भावपूर्ण गायन, संगीत की सधी हुई लय और आकर्षक मंच सज्जा ने इस सांस्कृतिक आयोजन को एक यादगार अनुभव में बदल दिया। यह संध्या केवल मनोरंजन मात्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उपस्थित जनमानस के भीतर सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा की भावना को और भी गहरा कर दिया। कार्यक्रम का समापन किसी महा-अनुष्ठान की भांति हुआ, जहाँ पूरा सभागार एक स्वर में वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। वह क्षण हर उपस्थित व्यक्ति के लिए न केवल भावनात्मक रूप से उद्वेलित करने वाला था, बल्कि सदैव के लिए स्मृति पटल पर अंकित होने वाला एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। प्रकाश/08 मई 2026