लेख
10-May-2026
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया जब सुवेन्द्रू अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में देशभर की राजनीति का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा और एनडीए शासित राज्यों के अनेक मुख्यमंत्री तथा हजारों कार्यकर्ता इस अवसर के साक्षी बने। यह केवल सरकार गठन का कार्यक्रम नहीं था बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया। शपथ ग्रहण समारोह में उस समय भावनात्मक दृश्य देखने को मिला जब प्रधानमंत्री मोदी मंच पर घुटनों के बल बैठकर जनता को प्रणाम करते नजर आए। इस दृश्य ने भाजपा समर्थकों में उत्साह भर दिया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि देकर की। बंगाली संस्कृति और परंपरा को सम्मान देने का यह संदेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना गया। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने भाजपा के 98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया और उनके पैर छूकर पार्टी के पुराने संघर्षों को याद किया। सुवेन्द्रू अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना साधारण राजनीतिक घटना नहीं है। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे सुवेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार चढ़ाव देखे। नंदीग्राम आंदोलन से उभरे सुवेंदु ने बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। इसी आंदोलन ने राज्य में वामपंथी शासन की जड़ों को कमजोर किया था। बाद में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना और फिर ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराना उनकी राजनीति का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस बार भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर उन्होंने भाजपा की जीत को ऐतिहासिक बना दिया। नई सरकार के मंत्रिमंडल में दिलीप घोषअग्निमित्रा पॉल निशीथ प्रामाणिक, अशोक कीर्तनिया और शुदिराम टुडू को शामिल किया गया है। इन नेताओं के चयन से भाजपा ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ सरकार चलाना चाहती है। मतुआ समुदाय से आने वाले अशोक कीर्तनिया और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय रहे क्षुदीराम टूडू को मंत्री बनाकर पार्टी ने उन वर्गों को साधने का प्रयास किया है जो लंबे समय से राजनीतिक रूप से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा समर्थकों का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। परेड ग्राउंड भगवा झंडों और जय श्री राम के नारों से गूंज उठा। प्रधानमंत्री मोदी और सुवेंदु अधिकारी ने रोड शो करते हुए मंच तक पहुंचकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। भाजपा इसे केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि विचारधारा की विजय के रूप में प्रस्तुत कर रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत इस बात का प्रमाण है कि पार्टी की विचारधारा को अब राज्य में व्यापक स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि सत्ता परिवर्तन के साथ नई सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़ भी खड़ा है। पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल राजनीतिक हिंसा और कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा में रहा है। चुनावी हिंसा में कई भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मृत कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात कर भावनात्मक संदेश दिया। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि राज्य में राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया। अब जब सत्ता भाजपा के हाथ में आ चुकी है तो जनता की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत हो और हिंसा की राजनीति समाप्त हो। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से उद्योगों के पलायन, बेरोजगारी और प्रशासनिक अव्यवस्था की समस्या बनी हुई है। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी रोजगार और निवेश का माहौल तैयार करने की होगी। भाजपा ने चुनाव के दौरान उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का वादा किया था। जनता अब इन वादों के परिणाम देखना चाहेगी। केवल राजनीतिक नारों से जनता का विश्वास लंबे समय तक नहीं जीता जा सकता। सरकार को जमीन पर बदलाव दिखाना होगा। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था भी नई सरकार की परीक्षा लेने वाली है। कई क्षेत्रों में स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। हजारों स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं हुईं। अस्पतालों की स्थिति को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। कांथी में सुवेंदु अधिकारी के पड़ोसियों ने उम्मीद जताई कि अब स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती होगी, अस्पतालों में डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा। यह उम्मीदें नई सरकार के लिए अवसर भी हैं और चुनौती भी। महिलाओं की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का मुद्दा भी भाजपा ने चुनाव में प्रमुखता से उठाया था। राज्य में कई घटनाओं को लेकर भाजपा ने तृणमूल सरकार पर निशाना साधा था। अब जनता यह देखना चाहेगी कि नई सरकार अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में कितना सुधार ला पाती है। यदि भाजपा इस मोर्चे पर सफल होती है तो यह उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी। ममता बनर्जी की हार भी बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। लगभग पंद्रह वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में होगी। ममता बनर्जी लंबे समय तक बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहीं। लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने संगठन, रणनीति और नेतृत्व के दम पर राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी। अब तृणमूल कांग्रेस के सामने खुद को पुनर्गठित करने की चुनौती होगी। इस शपथ समारोह में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संकेत भी देखने को मिले। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सुवेंदु अधिकारी को बधाई संदेश भेजा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बंगाल की राजनीति केवल राज्य तक सीमित नहीं बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बंगाल की भौगोलिक और सांस्कृतिक स्थिति उसे राष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व देती है। नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक जीत को प्रशासनिक सफलता में बदलना है। भाजपा ने लंबे संघर्ष के बाद बंगाल में सत्ता हासिल की है। अब जनता की अपेक्षाएं बहुत बढ़ चुकी हैं। यदि सरकार कानून व्यवस्था सुधारने, भ्रष्टाचार कम करने, निवेश बढ़ाने और प्रशासन में विश्वास कायम करने में सफल होती है तो यह भाजपा के लिए पूर्वी भारत में स्थायी राजनीतिक विस्तार का आधार बन सकता है। लेकिन यदि अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी तो जनता का मोहभंग भी तेजी से हो सकता है। सुवेंदु अधिकारी के सामने अब केवल पार्टी नेता की भूमिका नहीं बल्कि पूरे राज्य के नेतृत्व की जिम्मेदारी है। उन्हें यह साबित करना होगा कि सत्ता परिवर्तन केवल राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि विकास और सुशासन की नई शुरुआत है। बंगाल की जनता अब घोषणाओं से आगे बढ़कर परिणाम देखना चाहती है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि भाजपा की यह ऐतिहासिक जीत राज्य के भविष्य को किस दिशा में ले जाती है। (वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार-स्तम्भकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 10 मई /2026