- बिक्री में उछाल के बावजूद, चार्जिंग नेटवर्क की कमी और अविश्वसनीयता बनी चुनौती नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री में अप्रत्याशित उछाल आया है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी अब इस क्रांति के राह में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। गुरुग्राम के दिलीप यादव जैसे कई उपभोक्ताओं के लिए यह समस्या रोजमर्रा की हकीकत बन गई है, जिन्हें घर पर चार्जिंग सुविधा न मिलने पर वैकल्पिक और अक्सर अविश्वसनीय तरीकों पर निर्भर रहना पड़ता है। उनका अनुभव भारत के ईवी संक्रमण के सामने खड़ी बड़ी चुनौती को उजागर करता है: लोग गाड़ी खरीदने को तैयार हैं, लेकिन चार्जिंग की सुविधा अभी भी अधूरी और भरोसे के लायक नहीं है। हालिया आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत के ईवी बाजार ने 75 फीसदी से अधिक की शानदार वृद्धि दर्ज की, जिसमें इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की बिक्री 23,506 यूनिट तक पहुंच गई। वहीं, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री में 60.7 फीसदी और थ्री-व्हीलर में 3.3 फीसदी का इजाफा देखा गया। बिक्री में इस तेजी ने अब सारा ध्यान गाड़ियों की मांग से हटाकर मजबूत चार्जिंग नेटवर्क की ओर कर दिया है। एक ईवी चार्जिंग सॉल्यूशन फर्म के अधिकारी बताते हैं कि असली चुनौती सिर्फ चार्जर लगाने की नहीं है, बल्कि उन्हें भारत की कठोर परिस्थितियों– गर्मी, बिजली के उतार-चढ़ाव और ज्यादा इस्तेमाल में लगातार चालू और प्रभावी बनाए रखने की है। उनका मानना है कि ईवी को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए चार्जिंग स्टेशनों को पेट्रोल पंपों जितना भरोसेमंद बनाना होगा। संस्थान आईईईएफए की एक रिपोर्ट ने भी इस चुनौती की पुष्टि करते हैं। उसके अनुसार, 2026 के एक सर्वे में 43 फीसदी भारतीयों ने सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, 41 फीसदी ने चार्जिंग में लगने वाले समय और 31 फीसदी ने घर पर चार्जिंग की सुविधा न होने की चिंता जताई। फिलहाल भारत में प्रति 235 इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सिर्फ 1 चार्जर उपलब्ध है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह अनुपात 1:6 से 1:20 है। सतीश मोरे/10मई ---