ज़रा हटके
11-May-2026
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लंदन (ईएमएस)। गहरे समुद्री पानी में मछली पकड़ने गए मछुआरों के हाथ बेहद दुर्लभ जीव लॉब्स्टर हाथ लग गया, जो अपने अनूठे रंग के कारण चर्चा का विषय बन गया है। एक कंपनी की मछली पकड़ने वाली टीम को यह अद्भुत जीव मिला, जिसका शरीर आधा भूरे रंग का और आधा चमकीले नारंगी रंग का था। यह जीव दो अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ दिख रहा था। वैज्ञानिकों और मछुआरों दोनों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि ऐसे आधा-आधा रंग के लॉब्स्टर 5 करोड़ में से केवल एक ही पाए जाते हैं। कंपनी के अधिकारी ने इस असाधारण खोज के महत्व को समझा और तुरंत इसे संरक्षित करने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि ऐसे दुर्लभ जीव को सीधे उपभोग में लाने के बजाय लोगों के सामने लाना आवश्यक है, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रकृति की इस अनूठी देन के बारे में जान सकें। जैसे ही इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं, वे तेज़ी से वायरल हो गईं और वैज्ञानिकों का ध्यान भी इसकी ओर आकर्षित हुआ। इस लॉब्स्टर के दो रंग होने के पीछे एक विशेष जैविक घटना है, जिसे जेनेटिक मोज़ेकिज्म या गाइनेंड्रोमॉर्फिज्म कहा जाता है। इसका अर्थ है कि एक ही जीव के शरीर में अलग-अलग प्रकार की आनुवंशिक कोशिकाएँ मौजूद होती हैं, या उसमें नर और मादा दोनों के गुण एक साथ पाए जाते हैं। यह स्थिति इसके शरीर को दो स्पष्ट रूप से अलग रंगों में विभाजित करती है, जिससे यह और भी आकर्षक दिखाई देता है। इस अद्वितीय लॉब्स्टर को खाने के लिए इस्तेमाल करने के बजाय वुड्स होल साइंस एक्वेरियम को दान कर दिया गया है। यहाँ इसे वैज्ञानिक अध्ययन के लिए सावधानीपूर्वक रखा जाएगा और भविष्य में आम जनता के लिए भी प्रदर्शित किया जाएगा। एक्वेरियम की जीवविज्ञानी जूलिया स्टडली ने इस खोज पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह लॉब्स्टर न केवल देखने में मंत्रमुग्ध कर देने वाला है, बल्कि यह हमें प्रकृति की अद्भुत जटिलता और उसके भीतर छिपी विविधता के बारे में भी बहुत कुछ सिखाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे जीव प्राकृतिक चयन और आनुवंशिकी के रहस्यों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह घटना प्रकृति की अप्रत्याशितता और उसकी असीम रचनात्मकता का एक जीता-जागता प्रमाण है, जो हमें याद दिलाती है कि समुद्र की गहराइयों में अभी भी कितने रहस्य छिपे हुए हैं। यह दुर्लभ खोज एक बार फिर दर्शाती है कि प्रकृति कितनी अनोखी और अप्रत्याशित हो सकती है। यह लॉब्स्टर अब केवल एक समुद्री जीव नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक कौतूहल और आने वाली पीढ़ियों के लिए सीखने तथा प्रकृति के रहस्यों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। सुदामा/ईएमएस 11 मई 2026