बर्लिन,(ईएमएस)। भारत वर्षों से पाकिस्तान पर आतंकवाद के बूते पड़ोसी देशों को अस्थिर करने का आरोप लगाता रहा है, अब जय सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम) के चेयरमैन शफी बुरफत ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर लंबे समय से धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, जिसका मकसद क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को भंग करना है। बुरफत के अनुसार, पाकिस्तान के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों पर सेना का लगातार दबदबा दक्षिण एशिया में लोकतंत्र और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि सेना चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाकर, राजनीतिक नेताओं को फांसी देकर, असहमति जताने वालों को जेल भेजकर या निर्वासित करके, और कठपुतली शासकों को बिठाकर पर्दे के पीछे से राजनीति को नियंत्रित करती आई है। इसका मीडिया, न्यायपालिका और अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्सों में भी पूरा दखल है। सिंधी नेता ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को भी निशाने पर लिया। उन्होंने मुनीर के अति-राष्ट्रवादी नारों, परमाणु धमकियों और पड़ोसी देशों के खिलाफ आक्रामक बयानों को रणनीतिक आत्मविश्वास की कमी बताया। पाकिस्तान को बनावटी व्यवस्था बताते हुए, बुरफत ने आरोप लगाया कि सेना ने चुनावों में हेरफेर कर और असहमति को दबाकर बार-बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया है। उन्होंने दावा किया कि सेना महत्वपूर्ण सरकारी और न्यायिक फैसलों को नियंत्रित करती है, पत्रकारों को डराती है, तथा राजनीतिक विरोधियों को जेल में डालती है। बुरफत ने कहा कि विश्व समुदाय जानता है कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक आवाज़ों जिसमें पत्रकार, छात्र और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं को लगातार सेंसरशिप, जेल, जबरदस्ती गायब किए जाने और यातना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक सबूत दर्शाते हैं कि पाकिस्तानी सेना ने न सिर्फ चरमपंथी और आतंकवादी गुटों को संरक्षण दिया है, बल्कि पड़ोसी देशों के खिलाफ इलाके में अस्थिरता पैदा करने के लिए बार-बार उनका इस्तेमाल किया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तानी सेना के कमांडरों के गैर-जिम्मेदाराना बयानों और खतरनाक इरादों पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की। आशीष दुबे / 11 मई 2026