अंतर्राष्ट्रीय
11-May-2026
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त्रिनिदाद की पीएम कमला का अपमानित करने वालों को करारा जवाब पोर्ट ऑफ स्पेन (ईएमएस)। त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने अपनी भारतीय जड़ों पर गहरा गर्व जाहिर किया है, और उन लोगों को कड़ा जवाब दिया है जो उनकी पहचान के लिए उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं। प्रधानमंत्री बिसेसर ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी विरासत पर कोई शर्मिंदगी नहीं है, बल्कि इस पर गर्व महसूस होता है। यह बात उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया त्रिनिदाद-टोबैगो दौरे (8-9 मई) के दौरान कही। विदेश मंत्री जयशंकर के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में, कमला प्रसाद-बिसेसर ने कहा, त्रिनिदाद में भारतीयों को आज भी कुछ जगहों पर कुली कहकर बुलाया जाता है। यह एक अपमानजनक शब्द माना जाता है, लेकिन मुझे इसमें कोई शर्म महसूस नहीं होती है। उन्होंने अपनी बात को और मजबूती देकर कहा, मुझे गर्व होता है कि आज एक छोटी-सी कुली लड़की त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री है। यह बयान उन सभी को करारा जवाब था जो भारतीय मूल के लोगों को उनकी पृष्ठभूमि के कारण नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। प्रधानमंत्री बिसेसर ने इस दौरान अपने भारतीय पूर्वजों के संघर्ष और समर्पण को भी याद किया, जिन्होंने प्राचीन भारतीय सभ्यता, भाषाओं और संस्कृति को तमाम कठिनाइयों के बावजूद संरक्षित रखा। उन्होंने जोर दिया कि भारतीय पहचान को मिटाने के कई प्रयासों के बावजूद, हमारे पुरखों ने अपनी तहजीब और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखा। त्रिनिदाद की कुल आबादी में लगभग 45 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं, जो इस विरासत की गहराई को दर्शाता है। भारत और त्रिनिदाद के बीच संबंध 150 वर्ष से भी अधिक पुराना है। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में, बड़ी संख्या में भारतीय मजदूरों को गिरमिटिया (अनुबंध पर बंधुआ मजदूर) के रूप में त्रिनिदाद ले जाया गया था। इन मजदूरों ने वहां कड़ी मेहनत कर समाज में तरक्की की। आज त्रिनिदाद के कई अहम पदों पर भारतीय मूल के लोग आसीन हैं, और स्वयं प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर इस प्रगति का जीता-जागता उदाहरण हैं। अपनी विरासत को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने 9 मई को विदेश मंत्री जयशंकर के साथ नेल्सन आइलैंड का भी दौरा किया और एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीयों की याद में नेल्सन आइलैंड का नाम बदला जाएगा, जिसके लिए जनता से नया नाम सुझाने को कहा जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय बंधुआ मजदूर यहां अपने साथ पवित्र ग्रंथ लाए थे, और वे अंग्रेजी न जानने के कारण उन समझौतों को नहीं समझते थे जिनके तहत वे इस नई दुनिया में आए थे। नेल्सन आइलैंड, जिसका उपयोग 1866 से 1917 तक भारतीय गिरमिटिया प्रवासियों के लिए लैंडिंग और क्वारंटाइन स्टेशन के रूप में होता था, का नाम बदलना भारतीय समुदाय के बलिदान और योगदान को स्थायी पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आशीष दुबे / 11 मई 2026