अयोध्या (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय श्रीराम कथा संग्रहालय में प्राचीन पुरावशेषों को संवर्धित और संरक्षित करने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सहयोग से रविवार को संरक्षण प्रयोगशाला प्रारंभ किया गया। इसके लिए ट्रस्ट ने केंद्र से समझौता किया है। इस प्रयोगशाला का उद्घाटन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने किया। केंद्र की विशेषज्ञ टीम विशेष उपकरणों और आधुनिक तकनीकों के साथ संग्रहालय पहुंच चुकी है। संग्रहालय के निदेशक डॉ संजीव सिंह ने बताया कि इस संग्रहालय में भी पहले रखे गए अवशेष संरक्षित नहीं थे, जिसके कारण इनका क्षय हो रहा था। अब इसे संरक्षित करने के लिए प्रयोगशाला को तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच एक समझौता हुआ है। इसमें अवशेषों को सुरक्षित करने के लिए केंद्र द्वारा विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएगा। इस प्रयोगशाला में वैश्विक धरोहरों इस प्रकार से संरक्षित करेंगी जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहे। इसमें कोई भी वस्तु पर पर्यावरण व केमिकल का दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। बताया कि पांडुलिपियों के पेपर, ताम्र पत्र, भोज पत्र, लेदर, हाथी के दांत, मेटल, पत्थरों के अवशेष जैसे चीजों को संवर्धन किया जाएगा। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बैठक से पूर्व पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि शहीद स्तंभ का निर्माण 15 जून तक पूरा हो जाएगा, उसके बाद मंदिर में कोई भी निर्माण कार्य बाकी नहीं रहेगा। एलएंडटी व टाटा कंसल्टेंसी भी अपना कार्य 30 जून को पूर्ण कर लेगी। इसके बाद इनकी वापसी हो जाएगी। इसके बाद केवल वह टीम बचेगी जो एग्रीमेंट के अनुसार यहां देखरेख के लिए मौजूद रहेगी। बताया कि अब आम श्रद्धालुओं के लिए संपूर्ण मंदिर का दर्शन और सुलभ हो गया है। सुरक्षा दीवार वर्ष 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। श्रीराम कथा संग्रहालय में निर्मित 20 गैलरियों में एक हनुमान जी की भी गैलरी है, जिसे आईआईटी चेन्नई ने पूरा कर लिया है। उन्हीं की एक सहायक कंपनी की बाकी गैलरियां बना रही है। बताया कि राम मंदिर समेत अन्य मंदिरों के शिखर पर लाइटिंग का कार्य भी कराया जा रहा है। इसके लिए मॉक प्रदर्शन कर ट्रस्ट से सहमति मिलने के बाद कार्य किया जाएगा। इसे जून के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। जितेन्द्र 11 मई 2026