क्षेत्रीय
12-May-2026
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- कहा अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा करें इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत बंद बदमाश इमरान गोरी उर्फ चिकना उर्फ पंक्चर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते उसको राहत देते हुए उसके खिलाफ जारी जिला दंडाधिकारी का निरुद्धीकरण आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश में नजरबंदी की अवधि का उल्लेख नहीं किया गया था, जबकि यह कानून के तहत जरूरी है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट आशुतोष शर्मा ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखे थे। याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि इंदौर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने 4 अगस्त, 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत इमरान गोरी को सेंट्रल जेल इंदौर में निरुद्ध करने का आदेश जारी किया और उसकी बाद 22 जनवरी, 2026 को उसकी नजरबंदी की अवधि तीन महीने बढ़ाकर 15 मई, 2026 तक कर दी गई थी। राज्य सरकार ने भी इस आदेश को मंजूरी दी थी। इसके बाद एडवाइजरी बोर्ड की स्वीकृति मिलने पर निरुद्धीकरण की अवधि बढ़ाई गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने दलील दी कि शुरुआती आदेश में यह नहीं लिखा गया कि आरोपी को कितने समय तक निरुद्ध रखा जाएगा, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में यह स्पष्ट रूप से जरूरी है। हाईकोर्ट ने सुनवाई दौरान याचिकाकर्ता एडवोकेट के तर्कों से सहमत हो कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून आदेश में अवधि का उल्लेख करना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि जिला दंडाधिकारी के 4 अगस्त, 2025 के आदेश में यह अवधि नहीं लिखी गई थी, इसलिए आदेश शुरुआत से ही दोषपूर्ण था। और बाद में जारी विस्तार आदेश से इस मूल त्रुटि को ठीक नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि यह खामी तकनीकी नहीं, बल्कि मूल और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी है। हाईकोर्ट ने 4 अगस्त, 2025 का निरुद्धीकरण आदेश और 22 जनवरी, 2026 का विस्तार आदेश सहित सभी संबंधित आदेश रद्द कर दिए, साथ ही निर्देश दिया कि यदि इमरान गोरी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। आनंद पुरोहित/ 12 अप्रैल 2026