क्षेत्रीय
12-May-2026
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- रसूखदारों ने छल-कपट से हड़पी घर की रजिस्ट्री - खाकी पर संरक्षण के आरोप : 8 लाख के बदले वसूले 12 लाख, अब बाउंसर्स के दम पर दी घर खाली करने की धमकी :: इंदौर (ईएमएस)। प्रशासनिक दावों और साहूकारी अधिनियम की सख्ती को ठेंगा दिखाते हुए शहर में सूदखोरों ने एक बार फिर एक मध्यमवर्गीय परिवार की बरसों की जमा-पूंजी पर कुंडली मार ली है। ताजा प्रकरण मूसाखेड़ी क्षेत्र के शिवनगर का है, जहाँ एक आंगनवाड़ी सहायिका का आशियाना रसूखदारों के सुनियोजित षड्यंत्र की भेंट चढ़ गया। कर्ज के चक्रव्यूह में फंसी अनीता आदिवासी पति भारत चौहान, निवासी- 43, शिवनगर ने अब अपनी व्यथा को सार्वजनिक करते हुए मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता अनीता आदिवासी ने प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्होंने अपनी आकस्मिक जरूरतों के लिए ईश्वरचंद बिल्लोरे नामक व्यक्ति से 8 लाख रुपए की राशि ब्याज पर उधार ली थी। अनीता का आरोप है कि मूलधन की तुलना में वह अब तक करीब 12 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि ब्याज के रूप में चुका चुकी हैं, लेकिन सूदखोरों की तृप्ति नहीं हुई। ईश्वरचंद ने अपने भतीजे तेज कुमार बिल्लोरे के साथ मिलकर बैंक लोन स्वीकृत कराने का झांसा दिया और विश्वास में लेकर मकान की सौदा-चिट्ठी पर हस्ताक्षर करवा लिए। छल-कपट का यह सिलसिला तब चरम पर पहुँच गया जब 5 मई 2026 को आरोपियों ने बैंक परिसर में एक प्रायोजित वीडियो बनाया और जैसे ही रजिस्ट्री बैंक अधिकारी के हाथ में पहुँची, आरोपी उसे छीनकर चंपत हो गए। :: गर्भवती बेटी के सामने बाउंसर्स का तांडव :: प्रकरण की संवेदनशीलता तब और बढ़ गई जब अनुबंध निरस्त किए जाने के बावजूद 12 नवंबर 2025 को आरोपियों ने अनीता के घर पर 12 बाउंसर्स भेज दिए। उस समय अनीता अपनी 8 माह की गर्भवती बेटी के साथ घर पर अकेली थीं और आरोपियों ने आतंक फैलाकर घर खाली कराने का प्रयास किया। जब मामला थाने पहुँचा, तो पुलिस ने पीड़ितों की सुनने के बजाय उल्टा उन्हीं पर धारा 151 के तहत कार्रवाई कर दी। अनीता ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने तीन बार बैंक से लोन लेकर कर्ज चुकता करने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने मूल दस्तावेज दबाकर रखे जिससे हर बार लोन निरस्त हो गया। :: खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह :: इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका पीड़िता के लिए निराशाजनक रही है क्योंकि स्थानीय पुलिस इस गंभीर वित्तीय अपराध में निष्पक्ष जांच करने के बजाय कथित तौर पर आरोपियों को संरक्षण दे रही है। रसूखदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने पीड़िता को 19 मई तक स्वेच्छा से मकान खाली करने अन्यथा जबरन कब्जा करने की खुली धमकी दी है। प्रशासन की इस चुप्पी और पुलिस की उदासीनता ने पीड़िता को मुख्यमंत्री से गुहार लगाने पर विवश कर दिया है। अब यह देखना प्रासंगिक होगा कि शासन इस पीड़ित महिला को उसके अपने ही घर में सुरक्षा दिला पाता है या सूदखोरों का यह अवैध तंत्र विजयी रहता है। हमने मूलधन से अधिक राशि ब्याज में चुका दी है, फिर भी धोखाधड़ी कर हमारी रजिस्ट्री छीन ली गई। पुलिस और रसूखदारों के गठबंधन ने हमें अपने ही घर में बेगाना बना दिया है। यदि शासन से न्याय नहीं मिला तो हमारे पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई मार्ग नहीं बचेगा। - अनीता आदिवासी, पीड़िता प्रकाश/12 मई 2026