पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में 2026 के हालिया तनाव के कारण भारत के लिए गैस और तेल की आपूर्ति पर गंभीर दबाव बना है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी और 50% प्राकृतिक गैस का आयात करता है, जिसमें से अधिकांश होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने कूटनीतिक और घरेलू स्तर पर कई रणनीतिक कदम उठाए हैं भारत सरकार ने कूटनीतिक और भू-राजनीतिक संतुलन सक्रिय कूटनीति का इस्तेमाल कर भारत में निर्बाध गैस आपूर्ति के प्रयास किया भारत सरकार ने खाड़ी देशों के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत जारी रखी है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। भारत सरकार ने आयात स्रोतों में विविधता का फार्मूला भी अपनाया। भारत ने पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम करने के लिए रूस से सस्ता तेल खरीदने के अलावा, अन्य देशों से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं।इस के साथ ही घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन में वृद्धि का युद्ध स्तर पर प्रयास कर उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की। सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन को 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।सुरक्षित भंडार भारत के पास लगभग 74 दिनों का तेल और गैस का सुरक्षित भंडार है, जिसे विशाखापत्तनम, मंगलौर और पदुर की भूमिगत गुफाओं में जमा किया गया है।सरकार ने पीएनजी पर जोर दिया घरेलू इस्तेमाल के लिए पीएनजी का विस्तार किया जा रहा है, और ग्राहकों को पीएनजी मिलने पर एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मांग प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देकर आमजन को त्रासद होने से बचाने की भरपूर कोशिश की। सरकार ने उद्योगों को मिलने वाली गैस में कटौती करके घरेलू उपयोग (रसोई गैस) के लिए आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। इस के अलावा सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ने के बावजूद आम जनता को ईंधन पुराने दर पर उपलब्ध कराने का अभूतपूर्व काम किया जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया भर के प्रभावित देशों में ईंधन पर जबरदस्त बढोत्तरी की गई। दुनिया में सिर्फ अकेले भारत सरकार ने आम जन की सुविधा और रसोई को ईंधन किल्लत और महंगाई दोनो से बचाने का काम किया। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके आम नागरिकों को राहत दी है।वहीं अनावश्यक रूप से भंडारण पर कार्रवाई कर जमाखोरी और कालाबाजारी नहीं होने दी। आवश्यक वस्तु अधिनियम का उपयोग करते हुए, सरकार ने कालाबाजारी और गैस सिलेंडर के अवैध भंडारण के खिलाफ छापेमारी की है। घरेलू रिफाइनरियों को पूरी क्षमता से काम करने और एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। भारत सरकार ने विभिन्न माध्यमों से ऊर्जा दक्षता बढाने पर भी जोर दिया। सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली से चलने वाले उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया है, ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।इन उपायों के माध्यम से, भारत सरकार ने 2026 में उत्पन्न हुए गैस संकट के बावजूद, देश में ईंधन की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया है। आपको बता दें कि पश्चिमी एशिया में लंबे समय से जारी अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा मार्ग “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़” के लगभग बाधित हो जाने के कारण दुनिया आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रही है। यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है।विश्व के कुल व्यापारिक एलएनजी का लगभग 20% प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरता है। भारत ऐतिहासिक रूप से अपने लगभग 88% कच्चे तेल के आयात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त कार्रवाई के बाद इस मार्ग से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।भारत के लिए इसका प्रभाव तत्काल दिखाई दिया दरअसल भारत के लगभग 40% तेल आयात खाड़ी देशों से आते हैं। भारत के लगभग समस्त एलपीजी आयात सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत से होते हैं।भारत और खाड़ी देशों के बीच प्रतिवर्ष लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार होता है।यह व्यवधान अब दो महीनों से अधिक समय से जारी है, जिससे यह हाल के दशकों के सबसे लंबे और गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकटों में शामिल हो गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 70 डॉलर से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। केप ऑफ गुड होप के रास्ते जहाज़ भेजने के कारण डिलीवरी में 14–21 दिन अतिरिक्त लग रहे हैं माल ढुलाई लागत में लगभग 15–20% वृद्धि हुई है समुद्री बीमा लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात टर्मिनल कतर का रास लाफ़ान एलएनजी संयंत्र 2 मार्च से बंद है।इसके परिणामस्वरूप दुनिया के कई देशों को असाधारण कदम उठाने पड़े हैं की देशों ने ईंधन राशनिंग चार दिवसीय कार्य सप्ताह फ्यूल पास राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल जैसे कदम उठाए। इन देशों में पाकिस्तान बांग्लादेश स्पेन मिस्र जापान श्री लंका फिलीपींस दक्षिण कोरिया शामिल है दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में होने के बावजूद भारत ने कोई ईंधन राशनिंग नहीं, स्कूल बंद नहीं हुए, वर्क फ्रॉम होम निर्देश नहीं, कोई सार्वजनिक फ्यूल पास व्यवस्था नहीं की। कहीं भी ईंधन संकट नहीं होने दिया और देशभर में स्थिर ईंधन आपूर्ति की यह सब सरकार के त्वरित हस्तक्षेप और दूरदर्शिता से संभव हो पाया।भारत सरकार ने एलपीजी एवं घरेलू आपूर्ति सुरक्षा संकट के केवल 8 दिनों के भीतर सरकार ने एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया।रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया गया।घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर 36,000 टन प्रति दिन से 54,000 टन प्रति दिन किया गया यह 50% वृद्धि दुनिया विस्मित होकर देख रही है। इतना ही नहीं 9 दिनों के भीतर प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश जारी किया गया। पीएनजी घरेलू उपभोक्ताओं और सीएनजी सार्वजनिक परिवहन को 100% आपूर्ति सुनिश्चित की गई। औद्योगिक आवंटन को संतुलित किया गया ताकि आम जनता की जरूरतें प्रभावित न हों।भारत ने तेजी से अपने ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया रूस संयुक्त राज्य अमेरिका पश्चिम अफ्रीका अटलांटिक बेसिन आपूर्तिकर्ता के जरिए पर्याप्त भंडारण किया। भारत के पास वर्तमान में एलपीजी मांग लगभग 90,000 टन प्रति दिन जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 54,000 टन प्रति दिन है। आयात आवश्यकता घटकर लगभग 20,000 टन प्रति दिन रह गया है। भारत के पास लगभग 8 लाख टन एलपीजी कार्गो सुरक्षित लगभग 40 दिनों का अग्रिम भंडार उपलब्ध है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत लगभग दोगुनी होने के बावजूद भारत ने आम नागरिकों के लिए ईंधन कीमतें नहीं बढ़ाईं।भारत मे पेट्रोल की कीमत लगभग: ₹95 प्रति लीटर है जबकि हांगकांग मे ₹295/लीटर सिंगापुर ₹240/लीटर नीदरलैंड ₹225/लीटर इटली ₹210/लीटर जर्मनी 205/लीटर फ्रांस ₹200/लीटर ब्रिटेन ₹195/लीटर जापान ₹160/लीटर दक्षिण कोरिया ₹150/लीटर है। आपको पता रहे कि “सरकार वैश्विक संकट और भारतीय परिवारों के बीच सुरक्षा कवच बनकर खड़ी है।” लेकिन इस संकट की घड़ी में हर नागरिक का भी कर्तव्य है कि वह ऊर्जा के अनावश्यक दुरुपयोग को रोक कर उर्जा की बचत करे। अनावश्यक भंडारण नही करे एक जिम्मेदार ऊर्जा उपयोग के माध्यम से नागरिक भारत की मजबूती बढ़ा सकते हैं। जान लीजिए यह एक वैश्विक संकट है यह व्यवधान पूरी दुनिया में है बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी संघर्ष कर रही हैं भारत भी इन्हीं वैश्विक परिस्थितियों का सामना कर रहा है दरअसल यह स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा चुनौती है।भारत ने जिस तरह से इस संकट से निपटने और बोझ सीधे जनता पर नहीं डाला वह दुनिया के लिए मिसाल है। इस लिए अब हर नागरिक गृहणी को सोच-समझकर खाना पकाना है एलपीजी की बर्बादी रोकना है ईंधन का दक्ष उपयोग कर सार्वजनिक परिवहन / कारपूलिंग करें अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और बिजली का संयमित उपयोग करें। हर छोटी जिम्मेदार पहल भारत को और मजबूत बनाती है।” घबराहट में खरीदारी जमाखोरी अफवाहें सोशल मीडिया पर गलत जानकारी से बचना चाहिए। आपूर्ति प्रबंधन किया जा रहा है। नागरिक शांत और जिम्मेदार सहयोग करें।सरकार ने वैश्विक संकट के दौरान देश की रक्षा की है। अब नागरिक जिम्मेदार ऊर्जा उपयोग के माध्यम से इस प्रयास को और मजबूत बना सकते हैं।(लेखक राष्ट्रवादी चिंतक वरिष्ठ पत्रकार हैं ) ईएमएस / 13 मई 26