वॉशिंगटन (ईएमएस)। ब्राजील की स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्दर्न रियो डी जेनेरियो के कॉस्मोलॉजिस्ट मार्सेलो डी ओलिवेरा सूजा ने रिसर्च के दौरान गलती से एक ऐसा संभावित रास्ता खोज निकाला, जो भविष्य में मंगल की यात्रा का समय आधा कर सकता है। ताजा अध्ययन के अनुसार, आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष यात्री एक साल से भी कम समय में मंगल ग्रह तक जाकर वापस पृथ्वी पर लौट सकते हैं। यह खोज इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अभी तक मंगल मिशन की कुल अवधि लगभग तीन साल मानी जाती रही है। यदि यह नई तकनीक सफल होती है, तो यह अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ा बदलाव ला सकती है। दरअसल, इस खोज की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी, जब मार्सेलो डी ओलिवेरा सूजा पृथ्वी के नजदीक आने वाले एस्टेरॉयड्स पर अध्ययन कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने ‘2001 सीए21’ नामक एक एस्टेरॉयड के शुरुआती आंकड़ों का विश्लेषण किया। शुरुआती डेटा में यह एस्टेरॉयड पृथ्वी और मंगल दोनों की कक्षाओं को पार करता दिखाई दिया। हालांकि बाद में अधिक सटीक जानकारी मिलने पर इसका वास्तविक रास्ता अलग निकला, लेकिन शुरुआती अनुमान ने वैज्ञानिक को एक नया विचार दे दिया। सूजा ने महसूस किया कि यदि कोई स्पेसक्राफ्ट उसी तरह की ज्योमेट्री और ऑर्बिटल पथ का इस्तेमाल करे, तो मंगल तक बेहद कम समय में पहुंचा जा सकता है। उनकी गणनाओं के अनुसार, अक्टूबर 2020 जैसे विशेष ग्रहों के अलाइनमेंट के दौरान पृथ्वी से मंगल तक का सफर केवल 34 दिनों में पूरा किया जा सकता था। हालांकि इस योजना के सामने बड़ी तकनीकी चुनौतियां भी हैं। इतनी तेज यात्रा के लिए स्पेसक्राफ्ट को लगभग 32.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से उड़ना होगा, जो मौजूदा रॉकेट तकनीक की क्षमता से काफी आगे है। इसके अलावा इतनी रफ्तार से मंगल की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग करना भी अभी संभव नहीं माना जाता। इसके बावजूद इस रिसर्च ने वैज्ञानिकों को यह विश्वास दिलाया है कि मंगल तक पहुंचने के लिए छोटे और तेज रास्ते वास्तव में मौजूद हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने 2027, 2029 और 2031 में पृथ्वी और मंगल के संभावित अलाइनमेंट का भी अध्ययन किया। इनमें 2031 को सबसे उपयुक्त समय माना गया है। स्टडी के मुताबिक, यदि उस समय उपलब्ध तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो मंगल की पूरी राउंड ट्रिप केवल 153 दिनों यानी लगभग पांच महीनों में पूरी हो सकती है। योजना के अनुसार, स्पेसक्राफ्ट 20 अप्रैल 2031 को पृथ्वी से रवाना होकर 23 मई को मंगल पहुंचेगा। वहां लगभग 30 दिन बिताने के बाद 22 जून को वापसी शुरू होगी और 20 सितंबर तक यान पृथ्वी पर लौट आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में स्पेसएक्स का ‘स्टारशिप’ और ब्लू ओरिजिन का ‘न्यू ग्लेन’ जैसे शक्तिशाली रॉकेट इस तरह की गति हासिल कर सकते हैं। । बता दें कि इंसान का मंगल ग्रह पर बसने का सपना अब पहले से ज्यादा करीब दिखाई देने लगा है। अब तक माना जाता था कि मंगल तक पहुंचने और वापस लौटने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों की नई खोज ने इस सोच को बदल दिया है। सुदामा/ईएमएस 13 मई 2026