अंतर्राष्ट्रीय
13-May-2026
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सीमा पर बाड़ लगाने के फैसले से गरमाया माहौल ढाका,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सीमा सुरक्षा को लेकर अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई है। बंगाल सरकार के इस बड़े फैसले के बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बांग्लादेश सरकार ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि वह कटीले तारों या बाड़बंदी से नहीं डरता, लेकिन सीमा पर होने वाली मौतों को लेकर वह चुप नहीं बैठेगा। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने ढाका में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चुनावी बयानबाजी और शासन दो अलग बातें हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सीमा पर नागरिकों की हत्याएं जारी रहीं, तो हालात पहले जैसे नहीं रहेंगे। बांग्लादेश का मानना है कि यदि भारत दोस्ती बढ़ाना चाहता है, तो उसे सीमा सुरक्षा के मामलों में अधिक मानवीय और नरम रवैया अपनाना चाहिए। कबीर ने यह भी साफ किया कि उनका प्राथमिक रिश्ता भारत की केंद्र सरकार के साथ है और वे पश्चिम बंगाल की आंतरिक राजनीति में दखल नहीं देना चाहते, लेकिन वे इस बात पर पैनी नजर रखेंगे कि क्या नई सरकार अपनी राजनीतिक बयानबाजी को राज्य की नीति में बदलती है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच करीब 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से लगभग 569 किलोमीटर का हिस्सा अब भी बिना बाड़ के है। लंबे समय से यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी राज्य सरकार को सीमावर्ती जिलों में जमीन का इंतजाम करने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को अगले 45 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, बाड़ लगाने के लिए आवश्यक करीब 90 प्रतिशत भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है, जिसे अब जल्द ही बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा। दूसरी ओर, सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए बांग्लादेश ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) को हाई अलर्ट पर रखा है। उनका कहना है कि यह कदम सीमा पर किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाया गया है। दोनों देशों के बीच उपजे इस कूटनीतिक तनाव ने रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि एक तरफ बंगाल सरकार घुसपैठ रोकने के लिए कटिबद्ध दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश इसे मानवीय दृष्टिकोण से देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बाड़बंदी दोनों देशों के रिश्तों की नई इबारत कैसे लिखती है। वीरेंद्र/ईएमएस 13 मई 2026