नई दिल्ली,(ईएमएस)। क्रूज शिप एमवी होंडियस पर हंतावायरस के मामले सामने आने से वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने स्पष्ट किया है कि यह कोविड-19 जैसी नई महामारी नहीं है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख डॉ. टेड्रोस के अनुसार, हंतावायरस से सार्वजनिक स्वास्थ्य को मौजूदा खतरा बहुत कम है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, लार और मल से इंसानों में फैलता है। जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं,तब इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले सकता है। कोविड-19 के विपरीत, हंतावायरस हवा के माध्यम से आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता। इंसान से इंसान में संक्रमण अत्यंत दुर्लभ है, केवल एंडीज स्ट्रेन के मामले में ही बहुत करीबी और लंबे समय के संपर्क में ऐसा देखा गया है। सामान्य बातचीत या मिलने-जुलने से इसका संक्रमण नहीं होता। यह दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है-एक फेफड़ों पर हमला करता और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है। हालांकि हर साल वैश्विक स्तर पर करीब 60 हजार से एक लाख लोग इससे संक्रमित होते हैं, लेकिन इसका कोई स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है। एचपीएस, विशेषकर एंडीज स्ट्रेन, में मृत्यु दर 40 प्रतिशत तक हो सकती है, जो कोविड-19 से अधिक है। यह इस बात पर जोर देता है कि हमें महामारी आने से पहले ही टीके विकसित करने चाहिए। अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एमआरएनए आधारित वैक्सीन पर काम कर रही है, जो वर्तमान में प्रीक्लिनिकल स्टेज में है। हंतावायरस के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे बुखार, थकान, सिरदर्द, जिसके बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो सकता है। हंतावायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 8 सप्ताह तक लंबा होता है, जबकि कोविड-19 का 2-14 दिन था। कोविड-19 महामारी ने वैक्सीन विकास की तत्परता का महत्व सिखाया है। हंतावायरस के जानलेवा होने के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके इंसान से इंसान में सीमित फैलाव के कारण महामारी बनने का खतरा लगभग नगण्य है। लक्षणों की पहचान होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना, चूहों से बचाव और स्वच्छता बनाए रखना इसके खतरे को कम करने के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां हैं। आशीष/ईएमएस 14 मई 2026