राष्ट्रीय
14-May-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। आज का दौर पूरी तरह बदल गया है। कभी शाम होते ही लोग साथ बैठकर घंटों बातें करते थे, और अपने सुख-दुख बांटते थे। लेकिन अब स्मार्टफोन ने उस जगह को ले लिया है। हालात ये हैं कि परिवार के भीतर ही बातचीत कम हुई है। लेकिन क्या सच में लोग अब पहले से कम बोल रहे हैं? नई स्टडी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कई सालों तक चले एक बड़े विश्लेषण में सामने आया है कि आज लोग पहले की तुलना में काफी कम बोल रहे हैं। रिसर्चर ने साल 2005 से 2019 के बीच 22 अलग-अलग स्टडी के डेटा को देखा। इसमें करीब 2200 लोगों की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थी। नतीजों के मुताबिक, रोज बोले जाने वाले शब्दों की औसत संख्या में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है। पहले जहां लोग करीब 16,632 शब्द कहते थे, अब यह घटकर करीब 11,900 रह गया है। यह गिरावट खासतौर पर युवाओं में ज्यादा देखी गई। 25 साल से कम उम्र के लोग रोजाना औसतन 451 शब्द कम बोल रहे हैं, जबकि 25 साल से ऊपर के लोगों में यह कमी करीब 314 शब्दों की है। जानकार मानते हैं कि इसके पीछे हमारी बदलती जीवनशैली है। अब आमने-सामने की बातचीत की जगह मोबाइल और ऐप आधारित बातचीत हो रही है। संदेश और सोशल मीडिया ने बातचीत का तरीका ही बदल दिया है। पहले जिन कामों के लिए लोग सीधे बात करते थे, जैसे दुकान में मदद लेना, रास्ता पूछना या पड़ोसियों से बात करना, अब वह सब ऑनलाइन हो गया है। साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि इसका असर सिर्फ अकेलेपन तक सीमित नहीं है। आमने-सामने की बातचीत में जो भाव, आवाज का उतार-चढ़ाव और जुड़ाव होता है, वह लिखे गए संदेशों में नहीं मिलता। धीरे-धीरे बातचीत की बुनियादी क्षमता, जैसे सामने वाले की बात समझना और सही समय पर प्रतिक्रिया देना भी कमजोर हो सकती है। एक और अहम बात मां और बच्चों से जुड़ी सामने आई है। रिसर्च में सामने आया हैं कि जब मां स्मार्टफोन का इस्तेमाल करती हैं, तब अपने छोटे बच्चों से करीब 16 प्रतिशत कम बात करती हैं। यानी स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के साथ जरूरी बातचीत को भी कम कर रहा है। डेटा में सामने आया कि औसतन महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा बोलती हैं, जहां महिलाएं रोज 13,000 से ज्यादा शब्द बोलती हैं, वहीं पुरुष करीब 12,000 शब्दों के आसपास रहते हैं। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर उल्टा भी हो जाता है। एक्सपर्ट का मानना है कि इस स्थिति को बदला जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे बच्चों के साथ ज्यादा बातचीत करना, फोन कॉल को बढ़ावा देना और समय-समय पर मोबाइल से दूरी बनाना इसमें मदद कर सकता है। आशीष/ईएमएस 14 मई 2026