व्यापार
14-May-2026


भारत के लिए कच्चा तेल और सोना सबसे बड़े आयात, अर्थव्यवस्था पर असर नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज के आसपास शिपिंग प्रतिबंधों और सप्लाई में रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज आई है। कई देशों में इसका असर ईंधन की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है, जबकि भारत ने फिलहाल इस दबाव को कुछ समय तक अपने स्तर पर संभाला है। हालांकि राज्य चुनाव खत्म होने के बाद अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी का असर ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक टाटा म्युचुअल फंड ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत के लिए कच्चा तेल और सोना सबसे बड़े आयात हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी की तेजी लंबे समय तक बनी रही तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से उपभोक्ता महंगाई दर में करीब 45 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हो सकती है। साथ ही चालू खाता घाटा भी 30 से 40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक महंगे कच्चे तेल का असर भारत के निर्यात और खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस पर भी पड़ सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर के पार जा चुका है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार और भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर पर करीब 1 फीसदी का नकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 5 फीसदी के करीब पहुंच सकती है। टाटा म्युचुअल फंड का मानना है कि इस स्थिति में आरबीआई सतर्क रुख अपना सकता है और ब्याज दरों में कटौती की गति धीमी हो सकती है। सरकार बाहरी दबाव कम करने के लिए सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी जैसे कदम भी उठा सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती, तब तक रुपए पर दबाव बना रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन अब सामान्य स्तर पर आ चुका है और निफ्टी-50 का 12 महीने का फॉरवर्ड पी/ई करीब 19 गुना है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने से कंपनियों की कमाई का जोखिम बढ़ा है। महंगे कच्चे तेल, सप्लाई चेन में रुकावट और बढ़ती लागत का असर कंपनियों के मार्जिन और ग्रोथ दोनों पर पड़ सकता है। टाटा म्युचुअल फंड के मुताबिक 2027 में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान जो अभी 17 फीसदी है, घटकर 12 से 15 फीसदी तक आ सकता है। इससे शेयर बाजार में वैल्यूएशन रिकवरी भी धीमी पड़ सकती है। सिराज/ईएमएस 14मई26