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14-May-2026


ये नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और अगले पांच साल तक प्रभावी रहेंगे नई दिल्ली,(ईएमएस)। सरकार गाड़ियों के लिए बनने वाले नए कैफे-3 नियमों में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब इन नियमों में ई20 की जगह ई25 फ्यूल को आधार बनाया जा सकता है। मतलब आने वाले कुछ सालों में देश की ज्यादातर गाड़ियां ई25 पेट्रोल से चलेंगी, इसलिए नए नियम भी उसी हिसाब से बनाए जाएं। कैसे नियम यह तय करते हैं कि किसी ऑटो कंपनी की गाड़ियों से कितना कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन हो सकता है। ये नियम अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं और अगले पांच साल तक प्रभावी रहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक अभी देश में ई20 पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है यानी पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है। अब सरकार ई25 अपनाना चाहती है, जिसमें एथेनॉल 25 फीसदी होगा। एथेनॉल गन्ने और अनाज से भारत में ही बनाया जाता है। सरकार का मानना है कि अगर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाया जाएगा तो कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा और विदेशी तेल पर निर्भरता भी घटेगी। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर असर पड़ा। इसके बाद भारत सरकार के अलग-अलग विभागों ने ऑटो कंपनियों के साथ बातचीत शुरू की कि ई20 से आगे बढ़कर जल्द ई25 पर कैसे जाया जाए। सरकार को लगता है कि ज्यादा एथेनॉल इस्तेमाल करने से तेल आयात का बोझ कम किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) अब कैफे-3 के ड्राफ्ट में बदलाव कर सकता है। अभी तक जो टेस्ट और गणना ई20 फ्यूल के आधार पर हो रही थी, उसे अब ई25 के हिसाब से तैयार किया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि जब आने वाले सालों में गाड़ियां ई25 पर चलेंगी, तो फिर पुराने ई20 फॉर्मूले पर नियम बनाने का कोई मतलब नहीं है। ऑटो कंपनियां काफी समय से सरकार से कह रही हैं कि कैफे-3 नियमों को जल्द अंतिम रूप दिया जाए। कंपनियों का कहना है कि नए नियम साफ होने के बाद ही वे नई गाड़ियों, इंजन तकनीक और निवेश की योजना बना पाएंगी। गाड़ियों की टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल बहुत अहम होता है क्योंकि उसके आधार पर कार्बन उत्सर्जन मापा जाता है। एथेनॉल में सामान्य पेट्रोल के मुकाबले कार्बन कम होता है। इसलिए अगर पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, तो गाड़ियों से निकलने वाला कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी बदल जाता है। यही वजह है कि सरकार अब नए कैफे-3 नियमों में ई25 फ्यूल को आधार बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सिराज/ईएमएस 14मई26