व्यापार
14-May-2026


नीति आयोग के सदस्य गौबा ने भारतीय नीति निर्माण की कमी बताई नई दिल्ली,(ईएमएस)। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सालाना व्यापार सम्मेलन में भारतीय नीति निर्माण की कमी को बताया। उन्होंने कहा कि 1991 के सुधारों ने औद्योगिक लाइसेंसिंग को समाप्त कर दिया लेकिन लाइसेंस राज को नहीं। कारोबारों और सरकार के बीच जुड़ाव का स्तर और साथ ही किसी उद्यम को शुरू करने और चलाने के लिए जरुरी अनुमतियां, लाइसेंस और अनुपालन आदि अक्सर उद्यमियों को हतोत्साहित करते हैं। सरकार इस मोर्चे पर काम कर रही है। उसने हजारों अनुपालन जरुरतों को समाप्त कर दिया है और बड़ी संख्या में प्रावधानों को अपराधमुक्त किया है। उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना है। यह मानना होगा कि वैश्विक कारोबारी माहौल बीते कुछ सालों में बदला है और भारत जैसे देश को अपने कारोबारी माहौल में सक्रिय बदलाव लाना होगा। भारत चालू खाते के घाटे में है जो बहुत बड़ा तो नहीं है लेकिन उसकी भरपाई के लिए टिकाऊ रूप से विदेशी मुद्रा की आवक की जरुरत होगी। मौजूदा समय में जब देश से पूंजी बाहर जा रही है तब इस जरुरत को विशेष रूप से महसूस किया जा रहा है। अर्थशास्त्रियों ने संकेत दिया कि चालू वर्ष लगातार ऐसा तीसरा वर्ष हो सकता है जब भुगतान संतुलन में घाटा दर्ज होगा। पश्चिम एशिया संकट वर्तमान में पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर रहा है और शुद्ध स्तर पर भारत कुछ समय से कमजोर प्रवाह देख रहा है। पश्चिम एशिया में युद्ध विराम निश्चित रूप से अल्पकालिक राहत देगा लेकिन भारत को मध्यम और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से अपने व्यापक आर्थिक प्रबंधन ढांचे पर पुनर्विचार करना होगा। केवल विदेशी निवेशक ही हिचकिचा नहीं रहे हैं, भारतीय व्यवसाय भी विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों के बावजूद आक्रामक रूप से निवेश नहीं कर रहे हैं। गौबा ने कहा कि भारत को एप्पल जैसी कई कामयाबियों की जरुरत है। हालांकि यह मानना होगा कि एप्पल को उन तरीकों से सुविधा दी गई थी जो अन्य व्यवसायों विशेषकर छोटे व्यवसायों को मिलने की संभावना नहीं है। इसलिए एक जीवंत व्यापारिक वातावरण बनाने के लिए भारत को स्पष्ट नीतिगत निर्माण और निर्बाध अनुमतियों की जरुरत है ताकि छोटे व्यवसाय जो आमतौर पर ज्यादा गतिशील होते हैं, वह भी वृद्धि की आकांक्षा कर सकें। ऐसे में सही दृष्टिकोण यही होगा कि ‘जब तक मना न हो तब तक अनुमति’ मानी जाए। सरकार ने सोने और चांदी पर सीमा शुल्क भी बढ़ा दिया है। आभूषण उद्योग को प्रभावित करने के अलावा इसके अनपेक्षित परिणाम भी हो सकते हैं। लोग किसी तरह के तनाव के पहले ही संकेत पर ज्यादा सोना और चांदी खरीद सकते हैं क्योंकि शुल्क में संभावित वृद्धि उनके निवेश का मूल्य बढ़ा देगी। कुल मिलाकर यह पता है कि व्यापारिक वातावरण को सुधारने के लिए क्या करने की जरुरत है और सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इसका श्रेय भी उसे जाता है लेकिन अब गति को तेज करने की जरुरत है। सिराज/ईएमएस 14मई26