वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबर्ड इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई हैं। तुलसी पर आरोप लगे हैं कि 13 मई को केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) ने उनके कार्यालय पर छापा मारा और गोपनीय फाइलों के करीब 40 बक्से जब्त किए। इन फाइलों में कथित तौर पर जॉन एफ कैनेडी हत्याकांड और सीआईए के शीत युद्ध के दौरान के गुप्त माइंड-कंट्रोल प्रयोग एमकेयूएलट्रा से जुड़े दस्तावेज थे, जिन्हें गैबर्ड सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में थीं। अमेरिकी पत्रकार ने घटना की जानकारी दी, जिसके लिए उन्होंने सीआईए के मुखबिर जेम्स एर्डमैन तृतीय की गवाही का हवाला दिया। एर्डमैन ने सीनेट समिति के समक्ष दावा किया था कि सीआईए ने तब छापा मारा जब ये महत्वपूर्ण फाइलें सार्वजनिक होने वाली थीं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य अन्ना पॉलिना लूना ने भी इन आरोपों का समर्थन किया, एक्स पर सीआईए से दस्तावेज़ लौटाने या सम्मन का सामना करने को कहा। उन्होंने इस कदम को चिंताजनक बताया, विशेषकर यह देखकर हुए कि राष्ट्रपति ने जेएफके से संबंधित दस्तावेजों को पूरी तरह से सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। हालांकि, इन गंभीर दावों के तुरंत बाद, तुलसी गैबर्ड के कार्यालय ने इन्हें सिरे से खारिज किया। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की प्रेस सचिव, ओलिविया कोलमैन ने लिखा कि यह झूठ है सीआईए ने डीएनआई के कार्यालय पर छापा नहीं मारा। इस खंडन ने मामले को और उलझा दिया है, जिससे अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया है। आशीष दुबे / 14 मई 2026