- ज्ञान भारतम् मिशन अंतर्गत दतिया की सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण दतिया की प्राचीन पांडुलिपियों और पेंटिंग्स अब होंगी संरक्षित दतिया ( ईएमएस ) | आयुक्त पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल मदन कुमार नागरगोजे के निर्देशन में प्रदेश की प्राचीन समृद्ध संस्कृति एवं इतिहास को प्रकाश में लाने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर दतिया श्री स्वप्निल वानखड़े से चर्चांनुसार दतिया स्थित संग्रहालय में संग्रहित प्राचीन चित्रों के संरक्षण हेतु विभागीय दल जिसमें ज्ञान भारतम् मिशन के नोडल अधिकारी/वैज्ञानिक अधिकारी, अभिलेखागार संभाग एवं उपसंचालक उत्तरी क्षेत्र ग्वालियर पी.सी. महोबिया, डॉ. वसीम खान, पुरातत्वविद्, श्री साहू सेवानिवृत्त गाइड, अजय पाबिया, सपन साूु एवं श्री मुकेश गाडगे द्वारा 08 मई 2026 को दतिया जिले में श्री लोकेन्द्र सिंह गुर्जर नगर के पास संग्रहित 32 दुर्लभ पांडुलिपियों की जानकारी एप पर अपलोड की गई। लगभग 150 वर्ष से अधिक पुरानी इन पांडुलिपियों में भगवान श्री राम से संबंधित एवं अन्य दुर्लभ धार्मिक ग्रन्थ सम्मिलित हैं। विभागीय दल द्वारा दिनांक 09 मई को दतिया किले में दतिया राजपरिवार के श्री कुँवर घनश्याम सिंह जूदेव एवं महाराज श्रीमंत अरुणादित्य सिंह जूदेव के पास संग्रहित 525 दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया गया एवं इसकी जानकारी एप पर अपलोड भी की गई। राजपरिवार के पास संग्रहित इन पांडुलिपियों में अतिदुर्लभ पांडुलिपियों में पद्म पुराण, दांतों की चिकित्सा से संबंधित पांडुलिपि, राजा विक्रमादित्य पर आधारित दामोदर कृत हस्तलिखित सिंहासन बतीसी, राग गायन पर आधारित, कृष्ण लीला से संबंधित पांडुलिपियों के साथ ही आयुर्वेदिक, साहित्यिक और अनेक धार्मिक पांडुलिपियों का अवलोकन किया गया, जो राज परिवार के पास आज भी सुरक्षित है। विभागीय दल द्वारा दतिया संग्रहालय की पांडुलिपियों के साथ ही प्राचीन पेंटिंग्स का भी गहन सूक्ष्म अध्ययन किया गया। इन पेंटिंग्स में महारानी लक्ष्मी बाई, जयाजीराव सिंधिया, महाराजा भवानी सिंह एवं महाराज दलपत शाह की अतिविशिष्ट पेंटिंग्स को कंजर्वेशन की आवश्यकता होने से भोपाल अभिलेखागार लाया गया है। प्राप्त पेंटिंग्स में महारानी लक्ष्मी बाई की पेंटिंग लगभग 1853 में निर्मित है। जिसमें प्राकृतिक रंगों में स्वर्ण मिश्रित रंग का प्रयोग बारीक कारीगरी से युक्त है। इस पेंटिंग का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त है। डॉ. वसीम खान, पुरातत्वविद् द्वारा बताया गया है कि रानी के पीछे आंशिक रूप से दिखाई देने वाली टोपी उनके दत्तक पुत्र की है। संभवतः ये पेंटिंग महारानी लक्ष्मी बाई के पुत्र दामोदरराव के गोद लेने के उत्सव के दौरान की है। यह भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके अंतर्गत देश भर के मंदिरों, मठों, मस्जिदों, विद्यालयों, पुस्तकालयों एवं निजी संग्राहकों के पास संग्रहित प्राचीन ज्ञान जैसे इतिहास, विज्ञान, गणित और आयुर्वेद को खोजकर सुरक्षित किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत 16 जून तक प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम ऐप पर अपलोड किया जा रहा है। भावी पीढ़ी को इन ऐतिहासिक साक्ष्यों से परिचय करवाने हेतु इन पेंटिंग का कंजर्वेशन एवं डिजिटाईजेशन कार्य किया जावेगा।