राज्य
15-May-2026


* सूरत में आयोजित वीजीआरसी-वीजीआरई प्रदर्शनी में आदिवासी हस्तकला को मिला वैश्विक मंच, 5 दिनों में 5.31 लाख रुपये से अधिक की बिक्री गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात स्थापना दिवस के पावन अवसर पर सूरत में आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ (वीजीआरसी) और ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्जीबिशन’ (वीजीआरई) ने राज्य की विकास यात्रा को नई ऊंचाई प्रदान की। इस प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल द्वारा उद्घाटित ‘ट्राइबल हेरिटेज’ यानी पारंपरिक आदिवासी हस्तकला, खाद्य उत्पाद, वनौषधि और सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया गया। 1 से 5 मई 2026 तक आयोजित इस प्रदर्शनी में आदिवासी हस्तकला और पारंपरिक उत्पादों के 25 स्टॉल लगाए गए, जहां पांच दिनों में 5.31 लाख रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई। सबसे खास बात यह रही कि इस बिक्री से प्राप्त पूरी आय बिना किसी खर्च के सीधे आदिवासी हस्तशिल्पियों को मिली। प्रदर्शनी में गुजरात के विभिन्न जिलों से आए कुशल आदिवासी कारीगरों ने बांस की हस्तकला, लकड़ी की कलाकृतियां, पारंपरिक आभूषण, हैंडलूम वस्त्र, शुद्ध वनौषधियां और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का आकर्षक प्रदर्शन किया। आदिजाति विकास मंत्री नरेश पटेल के नेतृत्व में आदिजाति विभाग द्वारा इन स्टॉलों का आयोजन किया गया था। इसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना था। प्रदर्शनी में आदिवासी समुदायों की पारंपरिक कला, वेशभूषा, जीवनशैली, खानपान और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत परिचय देखने को मिला। इस आयोजन में कुल 38 आदिवासी हस्तशिल्पियों को भाग लेने का अवसर मिला। राज्य सरकार ने उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए यात्रा, आवास और भोजन की संपूर्ण व्यवस्था नि:शुल्क उपलब्ध कराई। प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राज्य मंत्री जयराम गामित सहित कई गणमान्य अतिथियों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर आदिवासी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। वीजीआरसी के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में गुजरात ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सोसायटी के कार्यपालक निदेशक डो. सीसी चौधरी ने ‘आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा’ विषय पर विशेषज्ञ के रूप में गहन और रोचक विचार प्रस्तुत किए। यह आयोजन साबित करता है कि ‘वाइब्रेंट गुजरात’ केवल उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण का भी सशक्त माध्यम बन रहा है। सतीश/15 मई