नई दिल्ली (ईएमएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी डिग्री के सहारे वकालत कर रहे लोगों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि काला कोट पहनकर न्याय व्यवस्था का हिस्सा बनने वाले कई लोगों की शैक्षणिक योग्यता संदेह के घेरे में है और जरूरत पड़ने पर मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जा सकती है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि वकालत केवल पेशा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की रीढ़ है और इसमें किसी भी तरह की फर्जीवाड़े की कोई जगह नहीं हो सकती। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हजारों ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आती रही हैं, जहां कानून की पढ़ाई से जुड़े प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठे हैं। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान वकीलों के सार्वजनिक व्यवहार और सामाजिक माध्यमों पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को मर्यादा, अनुशासन और जिम्मेदारी का उदाहरण बनना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा पाने की मांग से जुड़ी याचिका पर भी न्यायालय ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि सम्मान पद से पहले आचरण और पेशेवर जिम्मेदारी जरूरी है। कड़ी टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से माफी मांगते हुए अपनी याचिका वापस ले ली। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामला वापस लेने के आधार पर समाप्त कर दिया। इस सुनवाई ने देशभर में वकालत पेशे की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सुबोध/१५-०५-२०२६