ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में गंभीर सूखें की आंशका वाशिंगटन,(ईएमएस)। दुनिया पर ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते खतरे के बीच, वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका अनुमान है कि साल 2026 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में से एक हो सकता है। यह चेतावनी तब आई है जब उत्तरी गोलार्ध गर्मी के मौसम में प्रवेश कर रहा है और संभावित अल नीनो की स्थितियां तैयार हो रही हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लयूएमओ) ने अपनी अप्रैल की रिपोर्ट में बताया था कि भूमध्य रेखा पर प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह तेजी से गर्म हो रही है, जिससे मई से जुलाई के बीच अल नीनो की स्थिति बनने की बहुत संभावना है। हालांकि, अभी भी इसके प्रभावों का सटीक पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है। मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के अनुसार, यदि अल नीनो की स्थिति बनती है, तब इसका वैश्विक मौसम पर गहरा असर पड़ेगा। अमेरिका के दक्षिणी इलाके, दक्षिण अमेरिका महाद्वीप और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में अधिक नमी और बारिश की संभावना है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है। यूरोपीय यूनियन की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा ने इस साल की शुरुआत में ही अटलांटिक और भूमध्य सागर के कुछ हिस्सों में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म तापमान की सूचना दी है, जिससे यूरोप में असहनीय लू की आशंका बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रभाव इस स्थिति से और भी तेज हो सकते हैं। इस बढ़ते जलवायु जोखिम के बीच, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के डेप्युटी सेक्रेटरी को बैरेट ने कहा है कि डब्लयूएमओ और संयुक्त राष्ट्र प्रारंभिक चेतावनी पहल को बढ़ावा दे रहे हैं। इस दिशा में चीन ने विज्ञान-आधारित आपदा निवारण प्रणाली को मजबूत किया है। वहां एआई मॉडल का उपयोग अत्यधिक बारिश और तूफान के रास्तों के अल्पकालिक पूर्वानुमानों को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। रिमोट सेंसिंग तकनीक बाढ़, सूखे और भूवैज्ञानिक खतरों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी में मदद करती है। इसके अलावा, चीनी अधिकारियों ने बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे की विफलता से निपटने के लिए आपातकालीन अभ्यास भी बढ़ाए हैं, जो दुनिया के लिए एक मॉडल पेश करता है। आशीष/ईएमएस 16 मई 2026