ज़रा हटके
16-May-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। दुनिया भर में चीन में मौत की सजा देने का तरीका बहस और विवाद का विषय बना हुआ है। चीन में अब जहरीले इंजेक्शन के जरिए मृत्युदंड दिया जाता है, इससे पहले पारंपरिक फायरिंग स्क्वॉड का इस्तेमाल किया जाता था। चीन में अब इसके लिए विशेष “डेथ वैन” या “एग्जीक्यूशन वैन” का इस्तेमाल किया जाता है। ये वैन पूरे देश में घूमती हैं और जहां अदालत किसी दोषी को फांसी की सजा सुनाती है, वहां पहुंचकर उसी में सजा को अंजाम दिया जाता है। बाहर से देखने पर ये वाहन सामान्य पुलिस मिनीबस जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनके अंदर चलती-फिरती फांसी की कोठरी तैयार की गई होती है। बिना खिड़की वाली इन वैनों में विशेष स्ट्रेचर लगाए जाते हैं, जिन पर दोषी को बांधकर जहरीला इंजेक्शन दिया जाता है। चीन के कई प्रांतों में इन वैनों का इस्तेमाल पिछले दो दशकों से किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, कैदी को जेल से हल्की बेहोशी की हालत में वैन तक लाया जाता है। इसके बाद उसे स्ट्रेचर पर बांध दिया जाता है और डॉक्टर या तकनीशियन नस में इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। इंजेक्शन में आमतौर पर बेहोशी, सांस रोकने और दिल की धड़कन बंद करने वाली दवाओं का मिश्रण शामिल होता है। पूरी प्रक्रिया कैमरों और मॉनिटर के जरिए रिकॉर्ड की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सजा सरकारी नियमों के अनुसार दी गई है। चीन सरकार का दावा है कि यह तरीका पुराने फायरिंग स्क्वॉड की तुलना में अधिक “मानवीय” और व्यवस्थित है। पहले दोषियों को सिर में गोली मारकर मौत की सजा दी जाती थी, लेकिन इसमें अत्यधिक रक्तपात होता था। इसके बाद जहरीले इंजेक्शन की प्रक्रिया को अपनाया गया। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इस व्यवस्था की तीखी आलोचना की है। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कई मामलों में मृत कैदियों के अंग प्रत्यारोपण के लिए निकाल लिए जाते हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोषियों की आंखें, गुर्दे, यकृत और अन्य अंग अस्पतालों में भेजे जाते हैं। चीन सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि अंग प्रत्यारोपण केवल कानूनी अनुमति और परिवार की सहमति से ही किया जाता है। चीन दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सबसे अधिक मौत की सजाएं दी जाती हैं। यहां दर्जनों अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान मौजूद है। हालांकि सरकार आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन मानवाधिकार संगठन लगातार इस व्यवस्था को लेकर चिंता जताते रहे हैं। डेथ वैन की यह प्रणाली आज भी दुनिया के लिए रहस्य, भय और विवाद का विषय बनी हुई है। सुदामा/ईएमएस 16 मई 2026