सीएम योगी आदित्यनाथ ने कसा शिकंजा लखनऊ(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचारियों और कार्यप्रणाली में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक और बड़ी कार्रवाई की है। इस बार सरकार का डंडा आयुष्मान भारत योजना के तहत तय मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी अस्पतालों पर चला है। नियमों की अनदेखी करने पर प्रदेश के करीब 200 निजी अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाल दिया गया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों पर की गई इस कार्रवाई के तहत कुल 200 अस्पतालों पर शिकंजा कसा गया है। इनमें से 100 अस्पतालों का तत्काल प्रभाव से भुगतान रोक दिया गया है, जबकि अन्य 100 अस्पतालों को इस महत्वाकांक्षी सरकारी योजना से पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि इन अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत निर्धारित की गई आवश्यक प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं किया था। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की सीईओ अर्चना वर्मा ने इस संबंध में बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से इन अस्पतालों को पूरी प्रक्रिया समझने के लिए पर्याप्त समय और सहयोग दिया गया था। इसके लिए ई-मेल, फोन कॉल, संदेश, विशेष प्रचार अभियान और वर्चुअल बैठकों का सहारा भी लिया गया। इसके बावजूद ये अस्पताल तय समय सीमा के भीतर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में विफल रहे। अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश के 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक नए एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं, लेकिन इन 200 अस्पतालों ने बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी लापरवाही बरती। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना में पंजीकरण और संचालन के लिए 35 कड़े मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया है। इन कड़े नियमों के कारण ही बड़ी संख्या में अस्पतालों की धांधली और अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिसके बाद सरकार ने जनता के स्वास्थ्य और पैसों से खिलवाड़ करने वाले इन निजी संस्थानों पर यह सख्त कदम उठाया है। वीरेंद्र/ईएमएस/16मई 2026