विशेषज्ञ समिति की नई परिभाषा तय होने तक अरावली के “एक इंच” हिस्से में भी खनन पर रोक नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में खनन गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, कि जब तक अदालत द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की नई परिभाषा तय नहीं कर देती, तब तक क्षेत्र के किसी भी हिस्से में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने दो टूक कहा कि अरावली के “एक इंच” हिस्से का भी खनन के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान कहा, कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और अदालत इसकी “टुकड़ों में सुनवाई” नहीं करेगी। पीठ ने कहा कि जब तक न्यायालय पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में “अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा और संबंधित मुद्दे” शीर्षक से स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अरावली क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है, उसे लेकर अदालत को जो प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, वे काफी चिंताजनक हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी खनन पट्टा धारक के पक्ष में कोई राहत नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष उसे कानूनी रूप से चुनौती दे सकता है, लेकिन अदालत जल्दबाजी में कोई आदेश पारित नहीं करेगी। नए खनन पट्टे पर पहले लगी रोक दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को मंजूरी देते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में आने वाले अरावली क्षेत्रों में नए खनन पट्टे जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह फैसला विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था। समिति ने अपनी सिफारिश में कहा था कि जिस भू-भाग की ऊंचाई स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो, उसे अरावली पहाड़ी माना जाए। वहीं, 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को अरावली पर्वतमाला की श्रेणी में रखा जाए। नई परिभाषा पर आपत्तियां हालांकि, इस नई परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों और विभिन्न संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई थीं। उनका कहना था कि 100 मीटर ऊंचाई और 500 मीटर दूरी का मानदंड लागू होने से अरावली के बड़े हिस्से पर्यावरणीय संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकते हैं। विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को अपने पूर्व आदेश पर रोक लगा दी थी और सभी खनन गतिविधियों पर अंतरिम प्रतिबंध जारी रखा था। अब अदालत ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी और विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट आने तक अरावली में खनन पूरी तरह बंद रहेगा। हिदायत/ईएमएस 16मई26