रायसेन (ईएमएस)। वट सावित्री अमावस्या एवं शनिचरी अमावस्या का त्यौहार शनिवार को श्रद्धा भक्ति के माहौल में धूमधाम से मनाया गया।सुहागिन महिलाओं ने शनिवार को अपने पतियों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ वट सावित्री व्रत रखा। इस दौरान महिलाओं ने पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।यह व्रत प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। शनिवार को सुबह से ही सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर बरगद वट के पेड़ पूजा स्थलों पर पहुंचीं। उन्होंने वट वृक्ष (बरगद) के नीचे एकत्र होकर जल चढ़ाया, वट वृक्ष में धागा लपेटकर परिक्रमा की और अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। व्रतधारी महिलाओं ने मौसमी फल और पकवानों का भोग भी लगाया। धर्मशास्त्री पंडित ओमप्रकाश शर्मा पंडित राममोहन चतुर्वेदी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर जी का वास होता है। यह व्रत माता सावित्री की अमर कथा और उनके दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे।इस अवसर पर नवविवाहिताओं काजल, स्वाति, कविता,महिमा, सोनाली, सीता, रिया सिंह और जनकदुलारी लोधी ने बताया कि उन्होंने पहली बार यह व्रत रखा है। पहली बार व्रत रखने वाली इन नवविवाहिताओं में विशेष उत्साह देखा गया। सिद्ध बालाजी धाम मंदिर परिसर गंजबाजार , मिश्र तालाब घाट सहित विभिन्न स्थानों पर व्रती सुहागिन महिलाओं ने पूजन कर सूत लपेटकर परिक्रमा लगाई और पति की लंबी आयु की कामना की। ईएमएस / 16/05/2026