* कांग्रेस का आरोप – विपक्षी नेताओं को डराने, झूठे केस लगाने और चुनाव प्रभावित करने में हो रहा सत्ता का दुरुपयोग अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात प्रदेस कांग्रेस प्रमुख अमित चावड़ा ने राजीव गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार और कुछ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गुजरात में जहां कई ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी काम कर रहे हैं, वहीं कुछ भ्रष्ट और चापलूस अधिकारी सरकार के “हथियार” बनकर भाजपा कार्यकर्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरत, दाहोद, डभोई और वडोदरा सहित कई क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों पर झूठे मामले दर्ज कर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की गई। वडोदरा के कांग्रेस पार्षद आशिष जोशी के खिलाफ मतदान से दो दिन पहले बिना किसी ठोस सबूत के एफआईआर दर्ज कर राजनीतिक दबाव बनाया गया। छोटाउदेपुर जिले के संखेड़ा क्षेत्र में शराब पकड़े जाने के मामले में भी आशिष जोशी का नाम राजनीतिक दबाव में जोड़ा गया। चावड़ा ने कहा कि सामान्य मामलों में पुलिस सबूत सार्वजनिक करती है, लेकिन इस प्रकरण में ऐसा नहीं किया गया। आशिष जोशी ने स्वयं नार्को टेस्ट सहित हर जांच के लिए तैयार होने की बात कही, फिर भी उन्हें गिरफ्तार कर धारा 111 जोड़ते हुए सेंट्रल जेल भेज दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी को आसानी से जमानत मिल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अहमदाबाद जिले के बावला में कांग्रेस के निर्वाचित सदस्यों को झूठे मामलों और पासा की धमकी देकर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं, कोडीनार तालुका पंचायत के कांग्रेस सदस्यों के साथ द्वारका में होटल के कमरों में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और फर्जी मामलों में फंसाने जैसी घटनाओं को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ेगी। जिन अधिकारियों ने कानून से ऊपर जाकर भ्रष्टाचार और गैरकानूनी गतिविधियों में भाग लिया है, उनकी आय से अधिक संपत्ति और अवैध लेन-देन की जांच कराई जाएगी। कांग्रेस पीड़ित लोगों के साथ न्याय के लिए गांधीनगर मार्च निकालेगी और राज्यपाल के समक्ष ऐसे अधिकारियों को बेनकाब करेगी। एडवोकेट हितेश गुप्ता ने कहा कि संखेड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज शराब का मामला पूरी तरह निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद पांडे ने अदालत में स्पष्ट कहा है कि शराब उसने अपने निजी कार्यक्रम के लिए मंगवाई थी और वह आशिष जोशी को जानता तक नहीं। उन्होंने बताया कि आशिष जोशी ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए लिखित रूप से नार्को टेस्ट कराने की सहमति दी, लेकिन पुलिस ने कोई जांच नहीं की। इस आधारहीन एफआईआर को रद्द कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में क्वॉशिंग याचिका दायर की गई है। हितेश गुप्ता ने जांच अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरी जांच प्रक्रिया बेहद संदिग्ध और पक्षपातपूर्ण दिखाई देती है तथा राजनीतिक दबाव में कांग्रेस प्रतिनिधियों को परेशान करने की कोशिश की जा रही है। सतीश/16 मई