:: एसएनसीयू में नवजात शिशुओं की डिस्चार्ज दर 82.3% पहुंची, बेड क्षमता भी बढ़ी :: इंदौर/भोपाल (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना को निरंतर मजबूत कर रही है। राज्य सरकार के इन प्रभावी और जमीनी प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में अभूतपूर्व और सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है, जिससे आमजन को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल पा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू) के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार दिया गया था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुंच गई। इसके साथ ही, नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर अब तक के अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। गंभीर रूप से बीमार शिशुओं के त्वरित उपचार के लिए राज्य शासन ने आईसीयू बेड क्षमता को भी 1,654 से बढ़ाकर 1,770 कर दिया है। हालिया स्थिति की बात करें तो 1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच 62 एसएनसीयू में भर्ती बच्चों की डिस्चार्ज दर 85.2% रही, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वहीं, लामा दर मात्र 2.12%, रेफरल दर 4.2% और मृत्यु दर 8.29% दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकरण के लिए प्रदेश में जीरो सेपरेशन सिद्धांत पर आधारित 23 एमएनसीयू और उप-जिला स्तर पर 200 एनबीएसयू काम कर रही हैं। इसके अलावा, इंदौर और भोपाल में संचालित मदर मिल्क बैंक के माध्यम से 1,159 कमजोर शिशुओं को पाश्चुरीकृत डोनर मिल्क देकर उनका जीवन सुरक्षित किया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल नवाचार के तहत लागू की गई ई-शिशु परियोजना से अब तक 9,889 नवजात शिशु लाभान्वित हो चुके हैं, जिससे इंदौर और उज्जैन संभाग में शिशु मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है। प्रकाश/16 मई 2026