ज़रा हटके
17-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाना भी होता है। तेज गर्मी और लू के कारण शरीर में पानी की कमी, थकान और बेचैनी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए शीतली प्राणायाम शरीर और मन दोनों को राहत देने का एक बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है। आयुष मंत्रालय के मुताबिक, शीतली प्राणायाम एक ऐसी योगिक श्वास तकनीक है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। इस प्राणायाम को करने के दौरान व्यक्ति जीभ को मोड़कर नलिका जैसा आकार बनाता है और मुंह से ठंडी हवा अंदर खींचता है। इसके बाद सांस को कुछ क्षण रोककर नाक के जरिए धीरे-धीरे बाहर छोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर को ठंडक मिलती है और मानसिक तनाव भी कम होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शीतली प्राणायाम शरीर में बढ़े हुए पित्त दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है। यह पैरा सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे शरीर रिलैक्स महसूस करता है और अतिरिक्त गर्मी बाहर निकलने लगती है। यही वजह है कि गर्मी के मौसम में इसे काफी लाभकारी माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से तनाव, चिंता और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है। शीतली प्राणायाम को करना बेहद आसान है। इसके लिए सुबह के समय खाली पेट किसी शांत स्थान पर सुखासन या पद्मासन में बैठना चाहिए। इसके बाद जीभ को बाहर निकालकर उसे मोड़ते हुए ट्यूब जैसी आकृति बनानी होती है। फिर मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर खींची जाती है। कुछ सेकंड तक सांस रोकने के बाद नाक से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ी जाती है। इस प्रक्रिया को पांच से दस बार दोहराया जा सकता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राणायाम खासतौर पर तब फायदेमंद होता है, जब शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस हो रही हो या मौसम बहुत गर्म हो। हालांकि इसे हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। जिन लोगों को सर्दी, खांसी, अस्थमा या लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो, उन्हें यह प्राणायाम करने से बचने की सलाह दी जाती है। सुदामा/ईएमएस 17 मई 2026