राज्य
17-May-2026


कोरबा (ईएमएस) केंद्र सरकार द्वारा पारित चार लेबर कोड के बाद सबसे अधिक हालचाल फिलहाल कोल सेक्टर में देखी जा रही है। कोयला उद्योग में कार्यरत मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को छोड़कर एचएमएस, एटक, इंटक और सीटू लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। 9 फरवरी 2026 को आयोजित देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर कोयला क्षेत्र में भी देखने को मिला था। मजदूर संगठनों का कहना है कि चार लेबर कोड लागू होने से कोयला उद्योग की मौजूदा श्रमिक व्यवस्था और कई महत्वपूर्ण कमेटियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। जेबीसीसीआई के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। श्रमिक संगठनों के अनुसार, चार लेबर कोड में कहीं भी जेबीसीसीआई (ज्वाईट बाएसटीइट कमेटी फॉर कोल इंडस्ट्री) की बैठक या उसकी व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में जेबीसीसीआई के स्थान पर वार्ताकार परिषद का गठन किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत वही यूनियन परिषद में शामिल हो सकेगी, जिसे कम से कम 20 प्रतिशत मजदूरों का समर्थन प्राप्त होगा। 40 प्रतिशत समर्थन वाली यूनियन के दो प्रतिनिधि परिषद में शामिल होंगे, जबकि 51 प्रतिशत या उससे अधिक समर्थन पाने वाली यूनियन को कोल नेगोसिएटिंग यूनियन का दर्जा मिलेगा और वेतन समझौते पर उसका एकाधिकार रहेगा। मजदूर नेताओं का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अधिकांश यूनियनों के लिए 20 प्रतिशत समर्थन जुटाना भी कठिन होगा, इससे करीब 90 प्रतिशत यूनियनें वार्ताकार परिषद से बाहर हो सकती हैं। कोल इंडिया स्तर से लेकर उसकी विभिन्न कंपनियों, एरिया और परियोजना स्तर तक मजदूरों की सुविधाओं, सुरक्षा और खदानों के रखरखाव को लेकर कई कमेटियां कार्यरत हैं, समय-समय पर इनकी बैठकें होती हैं और मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जाता है। यूनियनों का मानना है कि यदि भविष्य में इन कमेटियों का अस्तित्व समाप्त हुआ तो कोयला उद्योग में औद्योगिक अशांति बढ़ सकती है। कोल इंडिया स्तर पर एपेक्स, वेलफेयर, सेफ्टी, जेबीसीसीआई मानकीकरण, सीपीआरएमएस तथा प्राकृतिक आपदा कमेटियां कार्य करती हैं। एपेक्स कमेटी में उत्पादन और उत्पादकता पर चर्चा होती है, जबकि वेलफेयर कमेटी मजदूरों के आवास, पानी, स्वास्थ्य और बिजली जैसे मुद्दों पर विचार करती है. सेफ्टी कमेटी खदानों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर चर्चा करती है। 17 मई / मित्तल