वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा भले ही ऊपरी तौर पर सफल दिख रही हो, लेकिन बीजिंग से लौटते ही उनके सामने ईरान का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अंदरखाने अब एक बार फिर युद्ध की आहट तेज हो चुकी है। ट्रंप के शीर्ष अधिकारियों ने बातचीत विफल रहने की स्थिति में ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने की पूरी योजना तैयार कर ली है। चीन से लौटते समय खुद ट्रंप ने एयर फोर्स वन में साफ कर दिया कि ईरान का नया शांति प्रस्ताव उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर उन्हें किसी प्रस्ताव की शुरुआत ही पसंद नहीं आती, तो वह उसे सीधे खारिज कर देते हैं। इससे साफ है कि कूटनीतिक बातचीत के रास्ते अब पूरी तरह अनिश्चित हो चुके हैं। फिलहाल अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक ऐसा समझौता कराने की कोशिश में हैं जिससे ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को व्यापार के लिए फिर से खोल दे, क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। अगर यह रास्ता खुलता है, तो ट्रंप इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश करना चाहते हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस समय दोहरे दबाव में है, एक तरफ युद्ध को खत्म करने का राजनीतिक दबाव है, तो दूसरी तरफ ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने का सैन्य लक्ष्य अब तक अधूरा है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार, हालात बिगड़ने पर हमले तेज करने की योजना पूरी तरह तैयार है और अगले हफ्ते तक बमबारी फिर से शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इसके लिए इजरायल और अमेरिका मिलकर बड़े पैमाने पर युद्ध का अभ्यास कर रहे हैं। रणनीति के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बमबारी की जा सकती है, या फिर अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज को जमीन पर उतारकर उसके परमाणु ठिकानों को सीधा निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह पीछे नहीं हटेगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने चेतावनी दी है कि किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब दिया जाएगा। फिलहाल पश्चिम एशिया में युद्धविराम के बावजूद 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक पूरी तैयारी के साथ तैनात हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 17 मई 2026