अंतर्राष्ट्रीय
17-May-2026
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- स्ट्रेट ऑफ हार्मूज में हुई घटनाओं पर भड़का भारत जिनेवा(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी गंभीर संघर्ष के बीच भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाना, चालक दल को खतरे में डालना और जहाजों की निर्बाध आवाजाही की स्वतंत्रता को बाधित करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हर हाल में पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि हाल ही में इस क्षेत्र में दो वाणिज्यिक जहाज डूब गए थे, जिसने वैश्विक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। भारतीय राजनयिक पार्वथानेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की एक विशेष बैठक में यह बातें कहीं। यह महत्वपूर्ण बैठक वैश्विक ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह को सुरक्षित रखने के विशेष उद्देश्य से बुलाई गई थी। भारत का यह कड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हमला किया गया था। इस बैठक में पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न हुए वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक संकट से निपटने के भारत के दृष्टिकोण के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार, इस अभूतपूर्व संकट से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ-साथ अल्पकालिक और संरचनात्मक उपायों का संयोजन बेहद आवश्यक है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज के पास स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। इसी क्रम में 13 मई 2026 को सोमालिया से आ रहे भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हमला हुआ था। ओमान के अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया था। हालांकि, यह हमला किसने किया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत सरकार ने इस घटना को पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य बताया है। इस साल फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक भारतीय ध्वज वाले कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। रणनीतिक रूप से ओमान के तट के करीब स्थित होर्मुज एक बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद से भीषण संघर्ष भड़का हुआ है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण इस जलमार्ग में जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसने भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/17मई 2026