राष्ट्रीय
17-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी गंभीर सैन्य संकट के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद सकारात्मक और राहत भरी खबर सामने आई है। तमाम रणनीतिक चुनौतियों और युद्ध के खतरों के बावजूद, ग्लोबल एनर्जी कॉरिडोर के नाम से विख्यात होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर कच्चे तेल से लदा एक विशाल टैंकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) क्षेत्र में ईरान और अमेरिकी सेना के बीच जारी भारी तनाव के बीच इस टैंकर का सुरक्षित निकलना भारत के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। शिप ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, करोलोस नाम का यह स्वेजमैक्स टैंकर इराकी कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुका है और ओमान की खाड़ी से होते हुए अरब सागर के रास्ते भारत की ओर अग्रसर है। शिप ट्रैकिंग के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की संख्या में इन दिनों भारी गिरावट दर्ज की गई है। पर्शियन गल्फ में जारी संघर्ष अब 12वें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिसके कारण समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध से पहले की तुलना में वर्तमान ट्रांजिट बेहद निचले स्तर पर बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि ईरान जल्द ही अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुक जाएगा, लेकिन तेहरान की ओर से होर्मुज पर अपनी पकड़ ढीली करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। ईरान ने युद्ध समाप्ति की वार्ता में लौटने के लिए पांच कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता को वैश्विक स्तर पर स्वीकार करना है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, करोलोस टैंकर इराक के बसरा टर्मिनल से कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। उपग्रह से मिली तस्वीरों और गुरुवार को ओमान की खाड़ी में इसकी स्थिति से संकेत मिला है कि यह जहाज पूरी तरह कच्चे तेल से लदा हुआ है। इस बीच, इराक से वियतनाम जा रहा एक अन्य तेल टैंकर अभी भी ओमान की खाड़ी में फंसा हुआ है, जिसे अमेरिकी नौसेना द्वारा रोके जाने की खबर है। होर्मुज जलमार्ग में फिलहाल सुरक्षा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि ईरान पर प्रतिबंध लागू करने के बाद अमेरिकी सेना अब तक 75 व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदल चुकी है। इसके अलावा, क्षेत्र में ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम संकेतों में बड़े पैमाने पर हो रहे हस्तक्षेप और ईरान से जुड़े जहाजों द्वारा अपने ट्रैकिंग सिग्नल बंद कर देने के कारण स्वतंत्र निगरानी करना कठिन हो गया है। इस अभूतपूर्व संकट और अनिश्चितता के दौर में भारतीय टैंकर का सुरक्षित निकलना देश की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से एक बड़ी खुशखबरी है। वीरेंद्र/ईएमएस/17मई 2026