क्षेत्रीय
17-May-2026
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खरगोन (ईएमएस)। जिले के ग्राम अकावल्या स्थित पाटीदार धर्मशाला में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण–रुक्मणी विवाह का भव्य एवं भावविभोर कर देने वाला आयोजन संपन्न हुआ। विवाह प्रसंग के मंचन के साथ ही पंडाल श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से गूंज उठा। भगवान कृष्ण और देवी रुक्मणी के दिव्य विवाह को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और वातावरण “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से भर गया।कथावाचक पंडित श्री शैलेंद्र शास्त्री ने अपने ओजस्वी वाणी-विन्यास में कृष्ण–रुक्मणी विवाह का क्रमबद्ध और रसपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने रुक्मणी के कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम, विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मणी द्वारा भगवान को भेजा गया प्रेम-पत्र, शिशुपाल से विवाह का संकट और अंततः भगवान कृष्ण द्वारा रुक्मणी का हरण कर विधि-विधान से विवाह—इन सभी प्रसंगों को भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। कथावाचन के दौरान उन्होंने बताया कि यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि भक्ति और विश्वास की विजय का प्रतीक है। श्रोताओं को यह संदेश मिला कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो स्वयं भगवान अपने भक्त की लाज रखते हैं।कथा के दौरान भजनों की मधुर स्वर-लहरियों के बीच भोले भंडारी गोपी रूप में ब्रज में पधारे। शिव–पार्वती के इस मनोहारी रूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं भगवान विष्णु ने हाथ में चक्र लेकर विभिन्न मुद्राओं में नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे रासलीला और भी अलौकिक बन गई। हर भजन पर पंडाल झूमता नजर आया और श्रद्धालुओं में अपार उमंग व उत्साह दिखाई दिया।कृष्ण–रुक्मणी विवाह के पश्चात एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब कथा आयोजक श्री प्रेमचंद पाटीदार एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजुला पाटीदार की 35वि वैवाहिक वर्षगांठ होने पर संपूर्ण पंडाल द्वारा उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर दोनों ने मंच पर एक-दूसरे को माला पहनाकर पुनः विवाह संस्कार सम्पन्न किया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा और दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास एवं संस्कारों के महत्व का सुंदर संदेश देकर गया। आयोजनकर्ता श्री प्रेमचंद पाटीदार, श्री अभिषेक पाटीदार एवं श्री गौरव पाटीदार ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अधिकाधिक संख्या में पधारकर भागवत कथा श्रवण कर धर्मलाभ लेने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 17 मई 2026, रविवार को भोजन-प्रसादी का आयोजन रहेगा, जिसमें सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाने का अनुरोध किया गया है। कुल मिलाकर, कथावाचक के भावपूर्ण वर्णन, कृष्ण–रुक्मणी विवाह की दिव्यता, मनमोहक रास और मधुर भजनों ने अकावल्या में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण रचा, जिसे श्रद्धालु लंबे समय तक स्मरण रखेंगे। ईएमएस / 17/05/2026