- जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 आस्था के प्रतीक चांदनी तालाब का पुनर्जन्म जन अभियान परिषद और जन-भागीदारी की एक अनोखी मिसाल दतिया ( ईएमएस ) | मध्य प्रदेश के दतिया जिले के विकासखंड भांडेर के अंतर्गत आने वाले सेक्टर सोहन का एक छोटा सा गाँव है ’चांदनी’। इस गाँव में एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का तालाब है, जिससे न केवल ग्रामीणों की आस्था जुड़ी है, बल्कि एक अनोखी मान्यता भी है। बुजुर्गों का कहना है कि इस तालाब के पानी में ऐसी चमत्कारी शक्ति है कि चर्म रोग (त्वचा की बीमारी) से पीड़ित कोई भी व्यक्ति यदि यहाँ श्रद्धा से स्नान कर ले, तो वह ठीक हो जाता है। लेकिन समय की मार और उपेक्षा के चलते, यह आस्था का केंद्र अपनी पहचान खो चुका था। पूरे गाँव की गंदगी, कचरा और नालियों का दूषित पानी इसी तालाब में मिल रहा था। पानी इतना सड़ चुका था कि वहाँ से गुजरने पर भी तीव्र दुर्गंध आती थी। जिस पानी को कभी जीवनदायी माना जाता था, वह खुद अपनी जिंदगी की भीख मांग रहा था। मध्य प्रदेश शासन द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए ’जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत की गई। इसी अभियान के अंतर्गत चांदनी ग्राम के पंचायत भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के अधिकारी श्री सुशील बरुआ संभागीय समन्वयक, श्री मुनेंद्र शेजवार’ जिला समन्वयक, श्री शैलेन्द्र लिटोरिया विकास खण्ड समन्वयक, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष श्री राघवेंद्र सिंह कौरव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी और समिति के सदस्य उपस्थित हुए। बैठक के दौरान जब जल स्रोतों को बचाने पर चर्चा शुरू हुई, तब ग्रामीणों ने भारी मन से इस ऐतिहासिक तालाब की दुर्दशा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह उनकी आस्था का यह केंद्र अब गंदगी के दलदल में तब्दील हो चुका है। अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने ग्रामीणों को समझाया कि सरकार सिर्फ रास्ता दिखा सकती है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब गाँव के लोग खुद आगे आएंगे। ’ष्गाँव का पानी, गाँव की साख और गाँव का श्रम इस मंत्र ने ग्रामीणों के दिलों को छू लिया। बैठक में सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि पूरी प्रस्फुटन समिति और समस्त ग्रामवासी मिलकर किसी बाहरी बजट का इंतजार किए बिना, स्वयं के सहयोग से इस तालाब का कायाकल्प करेंगे। ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों और राघवेंद्र सिंह कौरव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने हाथों में फावड़े, तगाड़ी और टोकरियाँ थाम लीं। शुरुआती चुनौतियाँ तालाब में बरसों से जमा प्लास्टिक, गाद (कीचड़) और जलकुंभी को हटाना आसान नहीं था। पानी की दुर्गंध के बीच काम करना मुश्किल था, लेकिन हौसला बड़ा था। पहले दिन कुछ लोग आगे आए, लेकिन देखते ही देखते पूरा गाँव इस महा-यज्ञ में आहुति देने निकल पड़ा। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया। लगातार ’10 दिनों की अटूट मेहनत, पसीने और सामूहिक प्रयासों’ का परिणाम यह हुआ कि वह तालाब जो कभी बदबू मार रहा था, आज वह साफ, सुंदर और स्वच्छ नजर आने लगा है। तालाब का पानी अब फिर से चमकने लगा है और इसके साथ ही ग्रामीणों के चेहरों पर भी आत्मसम्मान की चमक लौट आई है। चांदनी ग्राम की यह सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि समाज ठान ले, तो वह अपनी तकदीर और तस्वीर खुद बदल सकता है। जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन और श्जल गंगा संवर्धन अभियानश् की प्रेरणा से चांदनी गाँव ने न केवल अपने ऐतिहासिक तालाब को पुनर्जीवित किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का एक बेहतरीन पाठ भी लिखा है। आज चांदनी ग्राम का यह तालाब सिर्फ एक जल निकाय नहीं, बल्कि ग्रामीणों की एकता, अटूट आस्था और सामूहिक श्रमदान का एक चमकता हुआ प्रतीक बन चुका है।