क्षेत्रीय
17-May-2026
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शाजापुर (ईएमएस)। ग्रंथ और पुराण हमारे जीवन का आधार हैं, जिनको पढ़कर और सुनकर हमें इस भवसागर से आसानी से पार हो सकते हैं। रामायण जीने की कला सिखाती है और श्री भगवत गीता मरने का तरीका बताती है। उक्त आशीर्वचन 1008 महंत अनुजदास महाराज ने रेलवे मैदान स्टेशन रोड़ पर आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दौरान उपस्थितजनों के समक्ष प्रदान किए। श्री नित्येश्वर महादेव भागवत कथा समिति एवं सूर्या ग्रुप के तत्वाधान में आयोजित कथा महोत्सव का यह निरंतर सफलतम 15वां वर्ष है। इस वर्ष कथा प्रतिदिन शाम 7:30 से 11 बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा के दौरान महंतश्री ने रामायण और गीता का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में भाई कैसा होना चाहिए, पिता कैसा होना चाहिए, पुत्र कैसा होना चाहिए, माता कैसी होनी चाहिए और पत्नी कैसी होनी चाहिए अगर यह सीखना है तो रामायण से सीखना चाहिए और इंसान को सांसारिक मोह का त्याग करके अंतिम समय कैसे बिताना चाहिए चाहिए यह श्री भगवत गीता हमें बताती है। जीवन जीने का सार और अंतिम समय में संसार का त्याग कैसे किया जाए दोनों का रहस्य इन महानग्रंथों में छुपा हुआ है। इस अवसर पर महंत ने जीवन में परमात्मा की कथाओं का महत्व बताते हुए कहा कि सांसारिक जीवन में व्यक्ति ईर्ष्या, राग-द्वेष, अहंकार और क्रोध जैसे विकारों के वशीभूत होकर अपने जीवन के सुख और शांति को नष्ट कर लेता है। ऐसी स्थिति में उसके मन को शांति केवल अध्यात्म मार्ग पर चलकर परमात्मा की भक्ति से ही मिल सकती है। परमात्मा की अलौकिक कथाएं आध्यात्मिक मार्ग का वह नक्शा है जो परमात्मा के निकट पहुंचाने का काम करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं नगरवासीगण उपस्थित रहे। ईएमएस / 17/05/2023